होता-2

देवी का घर नहीं होता
तो लूटते तहो तोता
और जाडो जहा जोता

घर ले अदर देवी नहीं आती
घर के अदर तो श्री ल(क्ष)जी समाती

घर की रसोई मे मर-दान-गी झाडने झी झजा
खून की रगो मे आधा जन्म का करपूर कजा
मर-द मुडे सामने इधर उधर न्योता नजा
और पीछे खलोता खुजला खजा

अस्सी-नब्बे=सौ सब्बे


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u _ar gif_ _rap_ing
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जब तुम-हारो को घर के अदर कोई नही देखता
तो कान बाहर किस किस की लकीरे खीचता

तुम तो अपने अदर नही पडते पर पर पर
और बाहर भरपूर भूलाते आ अदर मर मर मर

आधे आम आये

कुछ ()नाम जो जह जये
आधे क़ब्र के कंधार कह कहे

मरी हुई (बेटी, बहन, मां, स्मा(दा)ज) सहे साये

जिसके अंदर किसी को नज़र नहीं नाये

सृष्टि गोदी गी गृह()स्थी आली आम आये