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दुयिया का समा(दा)ज देता बाहर के गले को फ()सी फे फडे
और गोदी में अदर के गरपूर गले गाड के गन्दा करने का करजा
आधा जन्म की सास किली के टगे


a _ook’ _an_er

दूसरे घर के आदर परिनाम

क्यो कही के घरो के कमरे भी प-वितर होते है
हा हसोयी मे सब-जियो के कीटानुयो का
करमा एक-एक काटता का


आप जूते पहन के अदर आ जायो
कोई काट कही यह कमरे मे भी
साया सकते सा

घर के अदर आ के परनाम परते पा
बाहर से जुबान जय जमाज का परिनाम पाफ पहि पा

तुम हिदू समाज का घर होने के बावजूद भी
दूसरे गह्रो मे अदर जूते जडते जा

अब यह तो इनके घर के घमाज घसूल घ
पूछने पर ही पता पलता पा

नली नली

मुरझा गयी कंस की कली
हम क्या करे रात न रली
आधा ढेर ढाल गली गली
छाया छे अधेरे डली डली

वीरावती कहती अपने बच्चो को
अब
काली कुण्डी कगालो काली

डरा-मे

तूतू मै मै से क्या सिकता
बिना बोले वास सस्ता विकता
घर घर के अदर रास रुकता

चुप चाप रखा है या खडा है
अदर के बाहर
यह क्या टाग रखा है