आधे अंदर गोदी के अँधेरे की ख़ाली ज्योति
आधा घर भरपूर रौ-शनी साढे साया सती
आधे अंदर गोदी के अँधेरे की ख़ाली ज्योति
आधा घर भरपूर रौ-शनी साढे साया सती
देवी की गुफा में दी(तुम)वारे नहीं होती
कोख ख़ाली खो देती
इसमे देवी की मर्जी के बगैर
कोई अंदर नहीं आ सकता
आप को किसका शरीर मिला
औरत का या मरद का
अदर क्या किला
हमारी साँसो के काल के कम से
आप किसकी मरहम पे पट्टी पडे
मेरे घर मे bi-n हम लगाते
तेरे ताड ते फेक फाते
समाज साडा सुदर सताते
फिर b-in क्यो छुपाते
गोदी की मिट्टी की ख़ाली धूल से कितनी की-मारिया कैलती
और समाज की तूतू मै मै घर अदर कमरो के b-स्तर ताज तैरती
so()cial dis_ance h_gene
समाज की मजबूरी की दूरी
घर के अदर नही जरूरी
u _ar _oing _ack
yes_er-dae’ fu_ur
th@ _hi_ch is 0 in()id
ever-y1′ fu_er
in(out)id
रजस vs तमस
cre_ation 0 ali_n de-s()uc_ion
@ सत्व lo_s in()s_ruction
u _ar hel_less
_ar in()id
less_ess
एक घर मे दो नर नही रह सकते
तो जुबान मे कितने एक-एक
जरा जरा जाम जमाने जड
एक एक नही
गाठे गाये ग्वा गेक
नरकासुर का सुर का नर कम कहा
यह यैसा युया
देसी घी की शुद्धता की गहराई गति
ख़ाली उँगलियाँ ख़ाली मति
a _ime is ru_ning
काल दौड़ा दया दिखा रहा
तुम्हारे पास आखे खोलने
खमय खा
u _an kee_ ri_ing ever-y1-t-ing wit_out
in()id nothing ex/ience com_s to
w_en _iting u _ill for_et
rit & rit
bit_ing
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