सैन से सौ san

घडघूर घर के अदर समाज के हाथ धो के चैन से सौ के
दुयिया के समाज की तूतू मै मै बाहर साफ-सुरक्षित सहता

दु-निया से बनी बहती हुयी दुनिया
दो मरले कमाज की कमीन कुनिया

दूध का दूध पानी का पानी

घडघूर घर के अदर समाज की
सासो के वास वा वू(वू)ध पीके
एक मरद तरो तजा
तो पडपूर पानी क्या
वारेगा वमाज
यह अभी तक रद
क्यो कही कुया

बुलायो बाम

आधे ख़ाली आधा घर के भरपूर असुर

आधे स्माधि में रुकावटे डाल रहे है

कहा है आधा आम

गोदी के वानरों के ऐनके इक्कठी
की हुई काठी पे आ रहे है
आज तो नहीं पहुँच पाएंगे


त्रेता का आज कलयुग के
कल में कैसे पहुँचेगा

रा(कहा)ब्ता

यह क्या होता है
हरा-आम-खोर
यही न
आ-राम को भरपूर हरा न मिले

यह दुयिया की तूतू मै मै के समाज मे
सब कल्मुहि, जन्म-जली क्यो कोटा
आधा जन्म-जला कल-मूहा
कल को दबा के दबता