सफर लम्बा नही गहरा
इतना की गहरायी में डूबना
सास का भरपूर छूटना अदर ही
दम घटे आखो का झूठ झडे
छूट कहा खाली खडे
सफर लम्बा नही गहरा
इतना की गहरायी में डूबना
सास का भरपूर छूटना अदर ही
दम घटे आखो का झूठ झडे
छूट कहा खाली खडे
s_ut है सास _lut है ससुर प्यास
मिला मिलाप बन गया बाप
तू तेरा तरपूर तिला ताप
मै मेरा छुपा छु()दर छाप
रिश्ते हमने नहीं बनाये
ना ही तुमने खाली कह खिलाये
जो भी आये अदर भरमाये
और जो बाहर भरपूर भिखाये
रूकती रग दो दगी दिखाये
ख़ाली खून खहो
मस्त मंदर मरो
गोदी के गुण गहो
सांसो से शास्त्र सहो
_ruth c_ears out li_ht fas_er
t_an
_il-ence in dar_ we_ar
in()id di_a_ter
हम है भरपूर नालायक
जडी जुबानो के नही नायक
सास का पूरा नाम खलनायक
जो न मिटे अदर वो ही बाहर
दबाये दायक
सृष्टि गोदी में कुत्ता भी शेर होता हा
घर के अदर असुरो की जुबान का
हेर फेर गडगूर गोता गा
नरपूर नाम को तेज भगाते
शरीर की मैल सास मे समाते
भरपूर भाव भरपूर साव साते
भर गये अदर दरपूर दाते
तेरी हसरत न होगी पूरी
बीच मे अदर है दगी दूरी
जो मिला मै फितरत तूरी
ले आया माफिला मजबूरी
नडायो नडा नरपूर नदर नूरी
आज की पडपूर पुस्तक
कल की दरपूर दस्तक
अदर न मिली फ़ुरसत
भिन भिनाये अदर बाहर
भिक्षुक की रद रुक्सत
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