त्यार

ना तुमने कोख मे रह खुश नही सीखा


जो हम तुम्हे आज सिखाये


लाते अंदर ही मरवाते है


बाहर दिखाने से गोदी ही रोती है


९ महीने रह के क्या किया


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(अच्छा अच्छा ()डे तोड़ रहे थे )


यह लो
लाते भी बीमा()र


अब शुरू से अंत भी त्यार

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अब इस बल का क्या मत है


मध्य म()य झूठ नही बोलता या बुलाता


म()य नही अदर लेटता


गाठ को झूठ ही दीखता


बल मत तो एक ही रहेगा


म()य और केंद्र भीतर ही होते है क्या

-ख गया या फिर दुनिया का भरपूर ()यान

मनुष्य को शरीर का दिखावा करना चबाया किसने


y-0-s के राक्षसो के भरपूर वास के भुलावे से ना ने


राक्षसो के भरपूर दिखावे इधर उधर की कहा()नियो के अदर भरपूर चढ़ावे


तो इसका बलमत इनके भगवन भी शुन्य शरीर होने का दिखावा करते है


बेड़ा ही ग()क है अदर

अदर उठे के बाहर लुटे


जब सास को अंदर मौत आती है तो

बाहर के शरीर को दफना या जला दिया आता है


जब भरपूर सास मर के अंदर ही ख़ाली जाग जाती है

उसके अंदर के भरपूर धढ़ अपने आप ही पूरे धढो को दफना देते है

या फिर ख़ाली अग्नि मे जल आते है

क्या हुआ

तुम-हरी सास मर-मार-मर के भी भरपूर भारी बीमा()री

आधा घर का स् -सार

यह क्या-क्यो लगा रखा है ऊची ऊची


अपवित्र असुरो ने अपने अदर ही भरपूर मदर


मनोरजन का अभाग्य निर-जन


शुरू करो दिन रात विसर-जन


अत ना भरे भरपूर दत-म()जन

कोई ना कोई

आप को कोई हरा नही सकता


क्यो


तो असुर क्या भरपूर पीला परते है


याद रखे


आप बहुत ही विश-all के भरपूर श(वे)श के अदर पूरे भरपूर वि()शेष है


भरपूर कार्य अदर ही अ()धा न()रेश है


अपवित्रता क्या अग्नि की भरपूर जलन को कम करती है

तो फिर किसे पवित्र भरपूर भड़काती है


काला चश्मा उतारते ही भरपूर बहुत साफ़ लिख रहा है ना