बल खा

एक सबक तो ज़िन्दगी के रिश्ते ही अदर सिखाते है
उससे बाहर के रिश्तो को क्ष-मता रहती है


एक हमसफ़र होतो ज़िन्दगी की दगिया निखार जाती है
लेकिन हा भरपूर जन्मो का साथ नही तोड़ती


चलो मान लो कोई नही सता रहा
फिर अदर ही क्यो तूतू मे मे का भरपूर एक बल खा रहा

बन गया

तूतू मे मे की दुनिया का एक तो मा-बाप को भरपूर सीख दिखाने के लिये पैदा हुया है


उससे अदर का भरपूर मा-बाप बन ही जाता है

आधा लय

सृष्टि गोदी की शांति भंग करने मे कुछ मज़ा ही भरपूर ज़िन्दगी का

यह-सास आधा के लिये

मुकम्मल है इधर उधर की आखो का तोहफा भरपूर इज़हार के लिये

हर सास के लिये जरूरी है काम के भरपूर वास की प्यास के लिये


छुप चुप के श्याम के अधेरे मे काम-ना है भरपूर इतकाम के लिये

खो-लो

अपवित्र असुर आधा जन्म के येसे _ift _rap है


जिसे कोई अदर से नही खोलना चाहता


और बाहर से _rap के _lit_er को देख खुसी-खुसी अदर ही जग()गाते है