नरपूर नाम को तेज भगाते
शरीर की मैल सास मे समाते
भरपूर भाव भरपूर साव साते
भर गये अदर दरपूर दाते
नरपूर नाम को तेज भगाते
शरीर की मैल सास मे समाते
भरपूर भाव भरपूर साव साते
भर गये अदर दरपूर दाते
तेरी हसरत न होगी पूरी
बीच मे अदर है दगी दूरी
जो मिला मै फितरत तूरी
ले आया माफिला मजबूरी
नडायो नडा नरपूर नदर नूरी
आज की पडपूर पुस्तक
कल की दरपूर दस्तक
अदर न मिली फ़ुरसत
भिन भिनाये अदर बाहर
भिक्षुक की रद रुक्सत
खुद के अदर मारने के लिये शूद्र
बिंदु के लिए ब्राहमन न बना मुग्ध
बचे जो काटे क्षत्रिय जडपूर जाटे
न जताये प्यार वैश्य मरा मार माटे
छेद करना तो आता ही नही
जिस थाली मे खाते है उसी को वही
नगा नरके दि(बही)खाते बरपूर बही
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बिना सोचे ही भरपूर भानुमान
गोदी के आधे का ख़ाली ध्यान
दूयिया के अदर नही है निशान
क्यो कही के पास नही है
ख़ाली ज़मीन का आसमान
आधे हरीआली गोदी आन
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भरपूर शक की नज़र नही जानती
गोदी के हक की कदर
आसमान नही गिरता जमीन नही रूकती
तब तक ख़ाली रात की रूह रही भटकती
एक-एक सास की खबर लेगा
काल का हिसाब किताब करेगा
गोदी की मिट्टी के लिये लड़ेगा
दूयिया जमीन जर्रा जर्रा डरेगा
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& tim is ru_ning _out f_own
to kee_ up _heck wit_out to_n
चैन की ख़ाली साँस (सब को दिखावा लगती)
लेना कितना मुश्किल है भरपूर घर के अदर
(तुम) सोचते हो की (मेरा-मै) तो अकेला हू (मुझे) नही फरक पडता
(मेरे) पास सब कुछ है इस समा(दा)ज से दूर रहने के लिये
घर बगला गाडी (बीमारियो से कमाया) पैसा
यह तो अच्छी बात है
समा(दा)ज की तूतू मै मै क्या
घर के बाहर पैदा होता है
यह अकेला कौन है
दज्जिया दाज दिकलाये दडी दात
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