_oor lit_le i a_wae _ets no s_o
that’ 0 okae mo
_oor lit_le i a_wae _ets no s_o
that’ 0 okae mo
y-0-s in()id u min_ful_ess hu-man to su/hu-man e*pan_ion
@ _ate of gut surface()all na_ure’ su/ _ood
0 2 be_ome su/ 0 de10tion
सारा कसूर जरूर तो भरपूर सास दवा(या)रा किया गया
वेदो की व्याखिया का भरपूर अनुशासन है
जब देखो _ast_ime * 2
अब सास को अपना _ast_i-me भी तो भरपूर प्यारा है
इसी लिये अदर ही व्याखिया का भरपूर नज़ारा है
बाकी तूतू मे मे की दुनिया जाये चाहे भरपूर एक झाड़ मे
मुझे तो अदर की पूरी ज़िन्दगी अपने आधा के साथ ही गुजारनी है
इस बात का पूरा यहसास है मुझे
उससे सृष्टि गोदी में जितनी सासे कड़ी होनी
है भरपूर खाद जाये
तूतू मे मे की दुनिया की एक-एक बिमा(या)रिया
तो है बिन मा की सास अदर त्यार-रिया
और बाहर भरपूर प्यार-रिया
@ time of dis_olution ever-i-thing me_ged in-to _ater
अब y-0-s in()id u का wa_er तो बीमा(या)रिया dis_olve नही कर सकता
तो फिर बीमे खोलने का उद्घाटन gut के अदर की
या-रियो के सूखे से ही करा लो
तुमने क्या सोचा था विधा(वा)ता के लिखे हुये
भाग्य को अंदर ही ख़ाली मोड़ोगे
तुम तो आधा जन्म का उदय हुया
भरपूर अदर-बाहर बदलोगे
रोग को खाते है
रोग को पहनते है
रोग को दिखाते है
और फिर अत मे
आधा जन्म का एक निरोग्य दिन कहलाते है
घर एक मन(का-भरपूर)दर होता है
जिसमे अदर का भरपूर वीर(य-ज)मान एक एक होता है
सच्ची सुदरता भरपूर सास को अदर मिलती है
बाहर दुसरे को एक अदर महसूस करा के
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