y-0-s in()id u _ill ne_er li(full_ess)berated for in()id c_c-le
as du_l _heel _as le_t
u _ar ri_ing in()id t_eft
y-0-s in()id u _ill ne_er li(full_ess)berated for in()id c_c-le
as du_l _heel _as le_t
u _ar ri_ing in()id t_eft
y-0-s in()id u a_way _ets in y _ae _y a_using ever-y1′
bodi-mind har_on()i in()id u
y-0-s in()id u suf_er-lo _ring in()id ever-y1 un_er on _tick
an e*mpt_ ve__el _ach _ost nois
ख़ाली मटकी शोर मचाती मा
और
y-0-s in()id u ()estle _ides _ol 1 _ir_y pois
u _oint it _out poin_ it u do-u_t
a y-0-s in()id _or_man _lames u _ools
जब जागो तूतू मे मे की दुनिया का एक लूट(ये)रा अदर ही लूटे रात का अधेरा
सौ सोनार की, एक लोहार की
ख़ाली लोहा सौ सोनारो का एक एक अंदर ही काटेगा
एक सोनार की, सौ लोहार की
दुनिया के अदर एक भरपूर का सोना सौ लोहारो को अदर ही बुझायेगा
बाहर आप कह के बुलाते
पाप अदर नही छूटे भरपूर लाते
एक हाथ से ताली नही तलती ता
हा तो दुनिया की भरपूर श(य्या)पथ एक सास के
साथ से ही ग्रह()न बही बरते बा
भरपूर त(ल)त्रा भरपूर गाड़ी और ख़ाली मंत्रा अदर अनाड़ी
अपवित्र असुर एक काम भरपूर बखूबी आखो से भरते है
भरपूर या ख़ाली हर इज़्ज़त उतारना
घर का कैदी अदर लका लाये
कला भरपूर भरी दुनिया अदर भाये
सास क्या जाने अदर-रक के रुके का स्वा()द
कल न पछताये आज पुछाये क्या हुया जब ठोड़ी ठग गयी अदर ठेठ ठाय
लाठी भाई अदर बाटी
तो इद्री हठ अदर भरपूर आती
भरपूर तल के ९०० ताल खुजलाये अदर एक बल बाये
t_ere’ _ife _ere’ on wor_d
wit_out wit_in _ap of na_ure
y-0-s in()id u w_or-l t()irl
a _hed_ing s_in or gut _urface()all _pin
_er-ving _ong no_er ever-y1 level _in
a_on u ne_er in(out)id _in
सास के अदर s_an_ard _ar ख़ाली दर्द होते है
so u _av to _ook in()id _other pe()ple’ weillage
for ever-y1-thing to _ing _ig _in
जब सास के अदर के काम कम-जोर है
तो बाहर भरपूर काम ढूढती आखे भरपूर मु()ड़ा _or है
o babi baabi baaaaabi
बच्चे क्या शरीर होते है इधर उधर उछाले अदर उछलते आ
भरपूर भछाल भय
————-
ਡਗਰ ਅੰਦਰ ਹੀ ਡਡੇ ਡਾਇ ਡਾਡੇ ਡਾ
श्री गणेश को विद्या-पढ़ाई का भगवन मानते है
और
सास के अदर विदाई की आई के आड़े नही भरपूर काटे
हठी दाते दिख(आ)वे के दाते दा
दिखावा क्या पड़()दा दा
किराये के घरो मे शरीर क्या खरीदे होते है
तक(दी)रीर कैसे खरीद सकते है जो आधा जन्म की बद()लत है
सास तो शरीर का मर()वीर बेच के भरपूर सोती है ताकि रात की
घुटी बात का बुरा भरपूर दामाद को दिन मे न यहसूस हो
You must be logged in to post a comment.