कौन काया

अस्थिर ऊर्जा अस्थिर विचार अस्थिर आदते
(सबसे पहले कौन भाया)

सास के दामाद को क्यो (इधर-उधर) पार ही केद्रित करती का

भरपूर क्यो यान का ध्यान सास का अदर-बाहर करता (उड़ाना) धर्ता

अब तलो की बीमा(या)रिया तो gut _ur_ace()all मे तैरती बहरी बेड़िया

इससे सास का दामाद भी तल के ऊपर साफ़ तैरता तेड़िया

भरपूर का भरपूर भडार भायदा भिड़या

का नावा

मनुष्य को तूतू मे मे की दुनिया का एक सत्य तो भरपूर प्यारा पा
और साथ ही अदर भरपूर गाठो के भरपूर तत्व का सत्य भरपूर बुरा बा
स-तुलन इधर-उधर कायम का काया कूर्ण का


बिना अदर सास को मारे बाहर की चिता का दिखावा
तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक मे हज़म होता ह()वा हा प()नावा

chan_ing con_onpan_ ever-y1′ _ae

a y-0-s _ife in()id u is ever-y1′ s_ag-nation

th@’ ri_ gro_t_ is 0 for _old ro_t()en
w_en u _ar _haking t_ings up, _an u _ow mov do_n ever-y-thing

y-0-s in()id u _ach u s_ep out()id u comfor_ _on

u loo_ing _ack in()id th@ un()not let y-0-s _ee pres()nt th()ough tha _an _ove for_ard

u _an _et y-0-s use s_all for out()id _ig chan_e 0 in()id th@ un()it _ang

chan_ing _ear is 0 cons_ant for no()mal _ill _top u in()id th@ _ear

it _ill 0 _et u fi_ure y-0-s in()id u _ar bus-y com_laining ne*t _tep

u in()id door_@ _ill we(illage)com chan_e 0 _an _top out()id _ang

y-0-s in()id u _ar _ever too _ate to _et u s_art in()id _ate

y-0-s in()id u re-ali-ty is clai_ing chan_e in(out)id
for ever-y1′ ever-y-thing b()inging in()id u _ang
& cons_ant u re_ain in(out)id con-sis-tent ef-for_ _ol _ain

u _av it in()id pant_y for _ure it _ill _ik y’all

डाडा डड़ा

()सौत का e_ail आता एख कब-रो का भरपूर पर-व-वाह पारा घर अंदर पड़ता
तो क्या बाहर दौड़ने दरता दारोमदार दड अदर डार भरपूर भडार भरता
डो डरते डाहो डोडो डा डाडा डड़ा

जान()वरो को बाया बिद्या बही भायी
तो बनावट से ही काम चाललो चायी
भरपूर का नही गुजारा बिना भायी
जरूरी है सास का दामाद एक बायी

इतनी छेड़खानी कच्ची कही प(क)रे-शानी
इतनी न अदर ढेरो बाहर भरपूर निगरानी
अदर दाना पानी भूले ख़ाली आम-निशानी
भरपूर आखो यार-शा इधर-उधर से उठाये भ-ग्यानी

गम है किसी किसी की भड़ास मे
सास अदर बाहर एक जाम
न भरपूर भाये भारी भरा मर-दाम
हाय आम हाय आम

दिया वार या

दुनिया दी दुया दा दिया
जाचे जड़ताले जरूर जेक जिया
न दवा न दया दी ख़ाली निया
अदर ही भडकाये भय भा मिया
भरपूर कब्र का घर व्याम व विया


जरूरत की चार दीवारे
भ्रमशान का शम वारे
जो जाये अंदर ख़ाली ख्यारे
तो नज़र न-य धीतर धर धारे


दिन रात गोदी को सताया
सास की सौत साडा साया
एक बात भरपूर भरमाया
अभी नही आया दिखा-वा दाया

र-सूल

तुम-हारो की भरपूर एक-एक की अदर की दुनिया

तूतू तरह मे मे बटी बुयी बही बा


यह मेरा घर का भरपूर सास का ससूल सा

इसमे तेरा तू बाहर इलाजमी लागू लोटा

तू _ic-अदर बाहर भरपूर c_uk-लोटा लगर