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a g_eat un_er-st@ings of _ol err’s is _a_m of y-0-s in()id u _ame

पूरे डठे आठ

तुम-हारे अपने अदर आधा जन्म की सास दगी भरपूर भर डकैत डाके
फिर दमाद तो भूले भटके भाटा के ज्वार जाके उचा आखे

ठाठ बाठ पूरे आठ
अदर भिड़े भरपूर जूठे जाठ
भात भात के भिरे नर नाठ
धरो भरपूर धत धत धेरे धुली धाठ

पिगला गाते

पढ़ाई का बल मत पढ़()आई

और सास का दामाद कहा गया है धरने
i को बाहर खरीदने खैर खाते
भरपूर भक भर अदर भय-लाते
एक-एक ना समझ बाहर बाते
पूरे पैर पड़े ना इधर उधर प()ते
परपूर पढ़ पिगला गला गाते

a_en it-y

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_ill pm _ur_ive in()id _tir
_ol nit re_ive _ull _en_ual _ur
@_ain _el_com _not_er _ound _men _ir


y-0 out(re_or)ce u sen_es in()id author-it-y
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o_ening an em_tee _lack u_b_ella in()id _ill _ring
y-0-s _ad _uck th@ s_a-y-s ne_er _uch
for()ver u in()id _uch


is y lea()ning _as no wit_in tu()ning
_h@ do()s th@ _ook _ik in()id chu()ning

le_arning urning


जब सास के दामाद अदर नही दफा
तो दिखावा का भरपूर मुखौटा बाहर खफा
किसने वेखा ऐसा भरपूर भोटा भफा और सोटा सफा

भरपूर भोट

तूतू मे मे को बहुत चोट चाटती च ख़ाली खोट
चुप रहने से ना भरपूर तूतू के जखमो को मा-रहम मै मिला
इसी लिए अदर की तूतू को ऊचा मे चिल्लाना जरूरी बाहर मै-जिला
भरपूर शोर मचाये रहम बाहर बिकवाये बिला

भरपूर प्यार से भरपूर इत्मिनान मे घर के अदर की शाति को
भग करके गहरे जखम जड़े सास के दामाद के दगो का दारोमदार

तो बाहर कौन सी भरपूर भाति की शाति का उपचार ढूढे
सास के गाठो के कधे न गोदी के चार मीनार

घर के अंदर नहीं ख़ाली इ()वार तो अंदर ही मनायो
माली हालत की मैली-सास मुहूर्त त्यार

(दफ(ना)तरो के काम भी भरपूर भा()ति भे दफ़न दाते द-यार)

भुना भड्डू

भरपूर शादी के मुद्दो का मडडू कीचड उछाले घर अदर भरपूर उचड्डू


y-0-s in()id u का लड्डू आधा जनम भी न गोल तारे भरपूर भाड का भड्डू


ज़ज़ा तज़ा की बात पर भरपूर बहाने बहने बो

y-0-s in()id u भरपूर त्यार के तराने तो


भरपूर प्यार पनप पहा पनाह पे
y-0-s in()id u को ही पाना परपूर पी
ख़ाली याद तो गुनाह अंदर अ-वार-गी
मेरे भरपूर को न रुलाना तू रोयेगी भी