गू-का

ख़ाली मईया से मिल के भरपूर भच्छा मेहफ़ूज़ मुया म()चा
ख़ाली घर आप को भरपूर भोट भाद भी बही बिला या यीला न()चा
इस बात का बही बाया ()पका प()चा
आधा सका भरपूर भच्चा

आधे रुका
ख़ाली मा ना झुका
रहने दे घर भरपूर गू-का

खोटा खाह

सास को तो अगिननत दुनिया देखन का दाव
तो दामाद क्या खुद सास को अदर सुन साव
दुनिया भी तो दामाद को अपने हिसाब से अब ताव-हाव
घर के अदर तो फिर बहे बी भरपूर भाव

मु()खोटे कितने बेव(_oop)फ बोते बा
अनजान को जान के अंधा धुंध अदर लड़ते लाडे ला
और जब खुद को जान-ते जा जब जहा जा खोटा खाह

अदर आने का रास्ता अब साफ़ सा तो बाहर बाते भरी मौत के भार के मुह मे
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i.e. y _et 0 in_u-ti-ve _ent
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शरीर का क्या है
कश्टो की सतु(क)ष्टि तो धड़ को धोहि
शरीर तो सहा सही सुत जो ना लड़े तो लारपूर लुट

जब तुम-हारो ने सास के दामाद को अगिननत दुनिया की
हवा-ले हार हरा तो शरीर क्या साफ़ हम हरेंगे

रूप वर्णन

श्री काल्कि का उल्लेख तो हिन्दू धर्म में धारणा ही आधार मान्यता


गोदी का भरपूर अंधकार बांटने के लिये सास के दामाद को अदर फुरसत नही


और काल(मय)की की गोदी का नाम अपने अदर दहाड़ने के लिए

भरपूर फिस्सडी फन-डर अदर

def-y sat_n-av

_ook y ne*t जन्म आधा _un_tion wit_ y-0-s in()id u इधर-उध()र _ife
u _ill _et do_ble y p_ide
0 _ub e_o _ide
_ar wor_t get_ing 0 _ull thi_st 0 su_side
each आधा in()id a 3rd con-inc()ide


आधा जन्म u _ull in-car-na-y-tion is y-0-s in()id u sta_us 1 sy_bol भूगोल

y-0-s in()id u c_eated _ap to na_i-gate 1 wor_d _ate
& _ost u _ide vi_ate in()id _ait 0 _ast _@
for it is _it-al for u 0 rec_tal re_ate

b_it

कलियुगे के कल-मनुष्य का आज-कल भविष्य (भाव-विष-यय)

भरपूर गाठो का एक-एक अदर शिष्य

1 wor_d f_ea_ur is _ooking b_ite उद्देश्य

ju_t a _ag

stre_ch 0 _ind
y-0 s_ay b_ind


for u in()id 0 _ar su()jected to y-0 _ive de_th &
0 _ble to e*/ience in()id _ub_ect even a_ter odd s_eath
& ob_ect /cept godi’ to()tal _ark in()id alive brea_th

adha janam _ill _ae hol _p_ice
for 0 fa_l_ing in()id _ut 3ice

ever-y-thing 0 s_arting sum_ere _ut
in_luding in-su()red dis()as()s 0 s_ut


a t_in _ull da()_age _ocks _an a_d 10 _ears to y-0 _age

मैं नहीं खाखन खायो

अब सृष्टि गोदी में मईया ने खुद बाल शुनया बिंदु

को माखन खाने खो खिला ख़हे खा

तो भरपूर भ()ल-ज़ाम तो सास की तूतू मे मे ने

अपना भरपूर सिद्ध करने के लिए लगाए ला

अब इस सास सो सदगे इधर-उधर के ख़ाली डंडे

ना भूले भाली भेहेर अदर-बाहर भरपूर भंडे

_oot1

1 we_k_ess 0 c_ear feel u st_ange in()id _ound
sum-1 own em_sh-un 0 _ach-ing qu()it _it 0 _oot

1 _ae _apping in-to y _id_en _eelings
_eep d_eam diu_nal

y-0-s in()id u _eeling do_n _eed to _heer y-up

tu_n 1 _out do_n in()id _aiting 1 _urn re_out

y re()que_t _an 0 be comp_eted _ow
for y-0-s in()id u _ar bu_y fr()8 _ow

सर सरे

y-0-s in()id u की ज़ुबान का खूले(आ)आम सरपूर साड़ा
तूतू मे मे से लड़े लरपूर लारू लाड़ा
दिन-रात एक आरे-आ-अदर भीड़े भाड़ा
जो लड़े सो मरे न उतरे क्रीड़ा करपूर काड़ा

0 दर-डर
घर के अदर एक एक का मुह-खोटा भरपूर उजारड़ते आ और
बाहर उजड़े हुयो हा एक-एक मुखौटा भरपूर पहनते पा


अदर एक एक के ऊपर पूरा _go _ub झाड़ते झा
और बहार एक एक से डरने के हज़ार मुखोटे अदर मुह छुपाते छा

ठेके
भरपूर सास ठेके तूतू मे मे समाज सेके
और भरपूर भौ()त गोदी के भरपूर भेके
यह क-मायी तो भरपूर भधायी आधा जन्म जाड़ा जेके


दिन में न भरपूर मौत से डरे
इसी लिए सास रात को ही भरपूर सर सड़े