दामाद को आसमान में भरपूर उड़ना
शरीर को ज़मीन पे भरपूर दहारड़ना
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भरपूर झाड़ना
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दिगा दरूर
ज़मीन की ख़ाली शक्ति की
देवी की गोदी का एहसास
अदर न ढूढे सास का ख़ाली रास
ध-रमो के बाटे भगवन की उपस्थिति
भहती भरपूर सास की आखो म-गरूर
सत-मन
आधा जन्म दरपूर दोसत
आधा जन्म दरपूर दुश्मन
तूतू मे मे तू-तान ताल टह()चान
अदर-बाहर एक-एक उरे-शन
परे इधर-उधर शेर-पुर शान शम-रन
लाह – पा
भरपूर की इधर-उधर गलती
सास अदर सही सुलाह शहर सल()ती
जले जो जाये ऊपर जय निचे जय जलती
हमें झा झरना ज़मीन जिसकी जलती
घर – आंखे
गोदी की आंखे तो ज़मीन पे
सास की भरपूर कर-तू(मे)तो तो तेखती तही
भगवन को तो ऊपर का फल तोड़ने की भरपूर इच्छा होती
सास के दामाद की तूतू मे मे दुनिया के एक-एक की पढ़ाई
अदर ही भरपूर भूचा भरती
घर दे दाहर दो दूर की दात
तुम-हारी मे ने घर के अदर ही
ज़ुबान के अन्न-गनित बायने वास्ते विनयाये
जब जी बाके बान बरपूर बू बढ़ाये
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c_oud 10_ion
01-01-01
no_ तक
सासो के दामाद द्वारा की हुई दुर्गति को कब तक
दूर की भरपूर गति भारमयोगे और अपने अदर
एक-एक दर परपूर पायोगे या सरपूर सरायोगे
0 _ince bi_th or else before hea_th
i do
0 _av _ime
2
0 _ess _ime
ever-y1-t_ing _ran-s_orm in()id 0s _y-me
y bo_i _hang for y-0-s
_et in()id u de_ange
_eep _aeing
_ar vi t_ere _et 0 chan_e
on-ly _reason y-0-s hu()man _av 0 evo_ved
for u _eep _aeing y-0 _oint un_no_n yo_ed

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