सत-मन

आधा जन्म दरपूर दोसत
आधा जन्म दरपूर दुश्मन
तूतू मे मे तू-तान ताल टह()चान
अदर-बाहर एक-एक उरे-शन
परे इधर-उधर शेर-पुर शान शम-रन

घर – आंखे

गोदी की आंखे तो ज़मीन पे

सास की भरपूर कर-तू(मे)तो तो तेखती तही
भगवन को तो ऊपर का फल तोड़ने की भरपूर इच्छा होती
सास के दामाद की तूतू मे मे दुनिया के एक-एक की पढ़ाई
अदर ही भरपूर भूचा भरती

घर दे दाहर दो दूर की दात
तुम-हारी मे ने घर के अदर ही
ज़ुबान के अन्न-गनित बायने वास्ते विनयाये
जब जी बाके बान बरपूर बू बढ़ाये

no_ तक

सासो के दामाद द्वारा की हुई दुर्गति को कब तक
दूर की भरपूर गति भारमयोगे और अपने अदर
एक-एक दर परपूर पायोगे या सरपूर सरायोगे

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0 _av _ime
2
0 _ess _ime
ever-y1-t_ing _ran-s_orm in()id 0s _y-me

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on-ly _reason y-0-s hu()man _av 0 evo_ved
for u _eep _aeing y-0 _oint un_no_n yo_ed