etc 2

mae 0 be _ae in()id u fr_e

0 nee_ed in()id y pro_ecting

_ut it 2 _est 0 _it _ok _est

rit _ow u _ar _esting _ow

s_ill it 0 re()all-y _mazing

y-0-s _eel @ h_m 0s le_t out _oam

a goo_ hea_thy we_k
is th@ e_en pos_ible in()id u o_d st_eak

y 0_ing see_s go rit 0 le_t in()id ever-y-thing _ark _it

s(um)t_ing 0 no_ing a_ur _ol g_owing

no _im

सासे गहरी करने के लिए घर के अदर उ()रजा रही राह
और काल को बदनामी का भाग भरपूर नाम भगा भरा भा
तूतू मै मै दुनिया मे एक=एक ने


मेरा शरीर मै मै माड़ी माफ़ मरना
तेरा त()रीर तूतू अदर खुला खडना
दामाद दो दाया दरी देहते दर()ड़ना

छाप

गोदी की मिट्टी के ऊपर राख
फिर भी इधर उधर भरपूर आख
अदर उगलाये बाहर बा बिलख विलाप
सास भारी भरपूर आसू छी छाप

तुम अंदर हमें नहीं जानते
तूतू मे मे का मौन मानते
इधर उधर नही रहते जागते
याद के यारपूर यही त्यागते

ज़ुबान का भतीजा कब तक भत्तीसी के भान से जुये जुड़ायेगा

हमारी आत्मज्ञान का दुःख तो सास ने अदर ही भरपूर आधा बिछा बखा बा

(ह)

आधा मरन की मैल
जिधर जन्मे जरपूर जैल
घर गी घूरी अदर-बाहर घुसैल
इधर उधर पाने पाली पा पैल

तूतू और मे मे साथ-साथ मिलाप माप
ताघ तोर तलत तिधर-तुधर तूर ताप
होगा क्या एक-एक फिर भरपूर विलाप
बजेगी बाठी बजायेगा भरपूर भाप