तड़प तड़प ताल

भरपूर शक की नज़र नही जानती
गोदी के हक की कदर
आसमान नही गिरता जमीन नही रूकती
तब तक ख़ाली रात की रूह रही भटकती

एक-एक सास की खबर लेगा
काल का हिसाब किताब करेगा
गोदी की मिट्टी के लिये लड़ेगा
दूयिया जमीन जर्रा जर्रा डरेगा

a _or_d _as no g_oun_

& tim is ru_ning _out f_own

to kee_ up _heck wit_out to_n

चैन चास

चैन की ख़ाली साँस (सब को दिखावा लगती)
लेना कितना मुश्किल है भरपूर घर के अदर

(तुम) सोचते हो की (मेरा-मै) तो अकेला हू (मुझे) नही फरक पडता
(मेरे) पास सब कुछ है इस समा(दा)ज से दूर रहने के लिये
घर बगला गाडी (बीमारियो से कमाया) पैसा

यह तो अच्छी बात है

समा(दा)ज की तूतू मै मै क्या
घर के बाहर पैदा होता है

यह अकेला कौन है
दज्जिया दाज दिकलाये दडी दात

मंगल गायो

बचा()यो बचा()यो बचा()यो

भरपूर कंस के घर को
शाति शनि शाह शूट शिया
स्री लक्ष()जी का लड़ लूट लिया

कंस को कोई नही देना अंदर का क़र

कोई आए बैठे साँस के साथ-साथ

संग संग सरा-सर

अच्छा मत मानो

ईंट पथरो का बना हुआ घर किसी ने सिखाया
गोदी की बुँदियों की जायदाद होता है

शरीर 1 sys_em की pro/ty होता है
यह शिक्षा कौन देता है घर के अदर
दुयिया के समाज की तूतू मै मै

_his h_use rests on
th@ pa_t la-ur-els

th@’ y _ol fe_l 1 mo_al