all ni_ 0ing hil_
in()id l&min fu_lfill
get s_eep h&sum 1 _ill
_ae t_ank y-0 y-1 ill
Category: y-0-s unkno-n
तड़प तड़प ताल
भरपूर शक की नज़र नही जानती
गोदी के हक की कदर
आसमान नही गिरता जमीन नही रूकती
तब तक ख़ाली रात की रूह रही भटकती
एक-एक सास की खबर लेगा
काल का हिसाब किताब करेगा
गोदी की मिट्टी के लिये लड़ेगा
दूयिया जमीन जर्रा जर्रा डरेगा
a _or_d _as no g_oun_
& tim is ru_ning _out f_own
to kee_ up _heck wit_out to_n
चैन चास
चैन की ख़ाली साँस (सब को दिखावा लगती)
लेना कितना मुश्किल है भरपूर घर के अदर
(तुम) सोचते हो की (मेरा-मै) तो अकेला हू (मुझे) नही फरक पडता
(मेरे) पास सब कुछ है इस समा(दा)ज से दूर रहने के लिये
घर बगला गाडी (बीमारियो से कमाया) पैसा
यह तो अच्छी बात है
समा(दा)ज की तूतू मै मै क्या
घर के बाहर पैदा होता है
यह अकेला कौन है
दज्जिया दाज दिकलाये दडी दात
दया देर दिखाया
met-a_(or)fo()sis नही आया
तो नरनूर नरो in(नर )fo()sys क्री-डा किराया
tec_no()lo_y 0 til tie tao _till स()माया
बाम बान बाम बाया
क()रो
आधे चिंता चट चरो
यह समा(दा)ज की तूतू मै मै
नही रोक रूकती
ne_work 0 re()tor
मंगल गायो
बचा()यो बचा()यो बचा()यो
भरपूर कंस के घर को
शाति शनि शाह शूट शिया
स्री लक्ष()जी का लड़ लूट लिया
कंस को कोई नही देना अंदर का क़र
कोई आए बैठे साँस के साथ-साथ
संग संग सरा-सर
ख़ाली आधा
u_gen_lee need prun()lax
nee_ to wee_ in()id wax
_an su_1 get _it wit_out tax
oh _eery _ind mo_ _ax
अच्छा मत मानो
ईंट पथरो का बना हुआ घर किसी ने सिखाया
गोदी की बुँदियों की जायदाद होता है
शरीर 1 sys_em की pro/ty होता है
यह शिक्षा कौन देता है घर के अदर
दुयिया के समाज की तूतू मै मै
_his h_use rests on
th@ pa_t la-ur-els
th@’ y _ol fe_l 1 mo_al
for me 2
ho_ असुर fam()il-y _ill _uy
t_ic_ets to pi_ces em_tee _ho_
u (_un)set an e*amपल
u (_un)ris _ill in()id _ise tramपल
e@ loकल _hink _loबल
कहा पैदा हुये कहा घर पहुचाया
मा तो है मिट्टी की मडउर माया
होटलो का भरते किराया
क्यो कही ने रास्ता कटाया
अदर सरसूर सडते साया

You must be logged in to post a comment.