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दुयिया का समा(दा)ज देता बाहर के गले को फ()सी फे फडे
और गोदी में अदर के गरपूर गले गाड के गन्दा करने का करजा
आधा जन्म की सास किली के टगे


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दूसरे घर के आदर परिनाम

क्यो कही के घरो के कमरे भी प-वितर होते है
हा हसोयी मे सब-जियो के कीटानुयो का
करमा एक-एक काटता का


आप जूते पहन के अदर आ जायो
कोई काट कही यह कमरे मे भी
साया सकते सा

घर के अदर आ के परनाम परते पा
बाहर से जुबान जय जमाज का परिनाम पाफ पहि पा

तुम हिदू समाज का घर होने के बावजूद भी
दूसरे गह्रो मे अदर जूते जडते जा

अब यह तो इनके घर के घमाज घसूल घ
पूछने पर ही पता पलता पा

डरा-मे

तूतू मै मै से क्या सिकता
बिना बोले वास सस्ता विकता
घर घर के अदर रास रुकता

चुप चाप रखा है या खडा है
अदर के बाहर
यह क्या टाग रखा है

फफायी अभि()यान मान

जन जन बाहर लोटा दुयिया अदर घला घोटा
गला गोटा भला भोटा


तू बूढ़ा मै बचा शाह
सौदा समाज सच्चा साह
गन्दगी अदर आशा नि()चाह
वह वोह वारपूर वाह


तूतू मै मै ने निसने नाता नोडा
समाज सा सुधार अदर निगोडा


जहा जहा तूतू मै मै की जुबान वही
होती प(द)ढाई जन जन की पहचान


आप ने हम से शादी करके तुम
पैदा किया तूतू मै मै का समाज