साफ सफा()यी समाज से _ap

घर अदर रसोई भरी पडी है
कलयुग के करो()ड लोभ मोह से
और अदर की चक-मक से बाहर
काम क-लाते का

अब साफ सफाई से साम ने १ सम्बर सी सगे सा
क्यो कही को सुरसत सही सिलती

घर के अदर बजुर(ब)गो को उचा बोलना
इजाजत जसीब जही जा
इसीलिये बाहर दूयिया के h_ass के
b_ades को सूना सु-नाते सा

भरपूर क्यो कही का दमाद दी दोच
दोज दाल दागते दा

p() सास

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हमारी गोदी गा गहना ग()य

भर भर भे भेटते अदर भय
और बाटते बाहर बाया बाय बय
सेसा ससुर-सास सा सूरा सहना

कितने पोते दोहते है तुम-हैरी सास के
आधा जन्म के एक-एक मिला के होगे

0-0 *

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सु-नाम सग्या

जो आज्ञा भरपूर भय भाग्य
विधाता वायापुर राम राग्य
बनवास बाहर बाया बैराग्य
सासे सुदर सरनाम -योग्य


जो मै घर के अदर हू हो वोह क्या तुम बाहर तरू तूतू
समाज से सीख के आये घर के अदर भरपूर राय रू()रू

जब घरो-घरो मे अतर करते
तो घर के अदर ज()तर जय जानते