चार चली खाली

चार दिन मे कमरा काली

चार दिन मे क्या होता है
जो एक रात मे नही होता
रात मे कोई एक कहा होता

सब पता होता
शाति बायी शख्सियत-शाली
मै हू इस कमरे की घर-वाली
भरपूर आधा बाहर रख-वाली
मै ही लाती आधा घर खुस(र)हाली

आधे गोदी में कहां निकला कहां वापस आया
इसका तो घर वालो ने अदर नही भरा किराया
अब ढूढते रहो इधर उधर करपूर कुया फिर आया

चांटा चाट

देवी के आधे की गुफा के अंदर
कितना गंद डाल के आते है
आधे अ()बूतर

यह शाति बायी की तौ-बा ने
कभी जमीन को छूया भी नही

फिर क्या कंस के घर के अदर
चाटा साफ करने आती

किसके मूह मे धूस रही ज़ुबान
भडकाती भूल भाया बान

सैन से सौ san

घडघूर घर के अदर समाज के हाथ धो के चैन से सौ के
दुयिया के समाज की तूतू मै मै बाहर साफ-सुरक्षित सहता

दु-निया से बनी बहती हुयी दुनिया
दो मरले कमाज की कमीन कुनिया

दूध का दूध पानी का पानी

घडघूर घर के अदर समाज की
सासो के वास वा वू(वू)ध पीके
एक मरद तरो तजा
तो पडपूर पानी क्या
वारेगा वमाज
यह अभी तक रद
क्यो कही कुया