मौत के मूह मे झोकते
तूतू मै मै का समाज क्या चौक-ते
घरो घडघूर दस्तक नही देता मोडते
एक एक मूह मे जय ज्योते
तुम तो हो वास की काली अधेरी रात
मे उडते रहो ठाठ की जात
मौत के मूह मे झोकते
तूतू मै मै का समाज क्या चौक-ते
घरो घडघूर दस्तक नही देता मोडते
एक एक मूह मे जय ज्योते
तुम तो हो वास की काली अधेरी रात
मे उडते रहो ठाठ की जात
कहते है गोदी कोई सीख सही सेहती
दुयिया के समाज की d()tail तूतू मै मै के आगे
एक घर की वास की de_ail कैसे कहती
यह si_n@ur मे क्या भरपूर भय
y na_ur
धड को हाथ तो क्या आखे भी नही छुहाते
धड को पकड रखा वास के काली काते
और तुमने अदर जकड जखा जाते
दिखावे आते जाते
चार दिन मे कमरा काली
चार दिन मे क्या होता है
जो एक रात मे नही होता
रात मे कोई एक कहा होता
सब पता होता
शाति बायी शख्सियत-शाली
मै हू इस कमरे की घर-वाली
भरपूर आधा बाहर रख-वाली
मै ही लाती आधा घर खुस(र)हाली
आधे गोदी में कहां निकला कहां वापस आया
इसका तो घर वालो ने अदर नही भरा किराया
अब ढूढते रहो इधर उधर करपूर कुया फिर आया
आज के समाज को सब पता है
घर के अदर क्या हो रहा है
ले-किन ढूढने से ढाल ढीला
chi_का
चोरी हुया घर के अदर से एक नर
घर लोटा समाज का एक-एक सडसूर स्तर
करमो का कर-मार कूडा कूमार
देवी के आधे की गुफा के अंदर
कितना गंद डाल के आते है
आधे अ()बूतर
यह शाति बायी की तौ-बा ने
कभी जमीन को छूया भी नही
फिर क्या कंस के घर के अदर
चाटा साफ करने आती
किसके मूह मे धूस रही ज़ुबान
भडकाती भूल भाया बान
आधे ख़ाली आधा मौत का मजा लूटते घर के अदर
दुयिया के समाज की तूतू मै मै का एक-एक su-दर अति सुदर
a _ur_ace su_ject 0 su in()id mi_dfu_l_ess e_ect
f_ying _out ho_ so-lo pro_ect
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