सृष्टि गोदी की शांति भंग करने मे कुछ मज़ा ही भरपूर ज़िन्दगी का
यह-सास आधा के लिये
मुकम्मल है इधर उधर की आखो का तोहफा भरपूर इज़हार के लिये
हर सास के लिये जरूरी है काम के भरपूर वास की प्यास के लिये
छुप चुप के श्याम के अधेरे मे काम-ना है भरपूर इतकाम के लिये

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