सास चाहे कुछ भी सोचे दामाद अंदर
जब साँस आँखों के सामने आएगी
गोदी का तय तभी gut मईया दिखाएगी
युग के समय के अंदर
रौशनी तभी जगायेगी
आधे आम भी भायेगी
सास चाहे कुछ भी सोचे दामाद अंदर
जब साँस आँखों के सामने आएगी
गोदी का तय तभी gut मईया दिखाएगी
युग के समय के अंदर
रौशनी तभी जगायेगी
आधे आम भी भायेगी
wh@level of y() ()urge
u want to experience in gut surface()all world
mae u reach in()ide
within is wiw o wid
mama boonda ()now
no one can put a ()ace on adhe’
mae u
हमारे घर के अंदर
babi o का _tir
खेले आंख मीचि
हम जो जायेंगे फर
छुपो चाहे जहा भी
गोदी का है ख़ाली दर
आपके केसों में रा है
फिर तो जूए भी होंगी
आप को पता है ना आधे
जूओ को ज़िंदा ज़ला जाता जय
जान की जंतर मंतर
५ साल में एक भी धार ख़ाली ध्यान की नहीं आई
ख़ाली डंडे पड़ते ही ५ second में ५ senses ख़ाली हो जायेंगी ही
फिर तो आधे भी आद आयेगी
5 birth un()not ()ough for 555
एह r-out बस कहा जाती है
v()ine
(this line un()not want to align centre)
com()nation mani how
ate chi
जिस घर में gut मईया नहीं उस घर में भगवन नहीं
मिटी का हो चाहे पथर का
मृगषरीर
for here is no gut mother nature within each breath’ lap, nor s’ood ()pace for god
कितने युगो से निवाला अंदर ही नहीं गया



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