कलयुग का अन्तहकरणा
श्री काल्कि जी का बिंदु ख़ाली नामा
ख़ाली आधा-आधे आमा
कलयुग का अन्तहकरणा
श्री काल्कि जी का बिंदु ख़ाली नामा
ख़ाली आधा-आधे आमा
अब स्वालाल एह है की
गोदी का ख़ाली दर ढाई धुंधर अहि आ
अणु-मिट्टी के कण-कण के अंदर
सम्पूर्ण देवी की वैशाली-शक्ति शुद्धि
आधे अंदर साँस पूर्ण स्माधि
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सृष्टि गोदी का ख़ाली परिवार
आधा आम – आधे आम
रवि(हर)वार
आधे साँसो का ख़ाली जहा(आ)ज
आऔ पधारो तुर्य्य अणु-पुत्र
बुँदियो को पता है आधे साँसे
non(dual)_top
जगी ज्योतिः
दो वक़्त का ख़ाली नि(वा)ला
चोड़ो चुनौती
सुना मईया गोदी का दिन देखना है
हम नही दिखाते-दिखाने के खाते गोदी का
दिन रात आमने सामने कहां आते
गोदी के नियमों का कैसे करते पालन
घर के अंदर बुँदियो औ का ख़ाली संचालन
दिन रात निखरे साँसो का कर्त्तव्य ख़ाली खालन
ख़ाली आत्माज्ञान ही ख़ाली गोदी का
खरपूर खौफ
सहता-कहता
आधे ख़ाली धर्मो के फल की इच्छा
अंदर आन अड़ो
वस्सू राजे आधे मईया का ख़ाली खालान स्थर सारदो
मईया हमसे ननु नमी न्योता
ध्यान धरो तुर्य्य अणु-पुत्र
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