gut मईया के बगैर तो पूरा गुजारा है
आधा क्या डुबआयेगा पूरा
सारी gut गोदी के लिए
gut मईया के बगैर तो पूरा गुजारा है
आधा क्या डुबआयेगा पूरा
सारी gut गोदी के लिए
तुमने तो अपनी तूतू में में की भरपूर कि-ताव की
भरपूर ला-चारी को आखो के सामने रखा
gut गोदी की आधे-राह गुजर कैसे मौत के हि-साव का
सामना कर रही है हर साँस के अंदर
अब एह-यह बचा है देखने के लिये
इधर उधर
अंदर बाहर
हमारा वेश तो सारा हरा है
तुम्हारा देस का भूखा घूरा भरा है
गोदी के अंदर ख़ाली द्वारा है
जो भी अंदर ख़ाली बैठे
ख़ाली मन ही उसका कुंवरा है
वोह समय काल के अंदर जीवित है
और यह समय आज के अंदर से गुजर रहा है
_h@ _ill adha do
wit()out
adhe breathing
d-i-d wit()in
emptee()ead adha
a()lon
a_er()t
आधे बूंदियो के ख़ाली बैठने से कितनी जलन होती है भरपूर वेहले को
हर वक़्त gut सृष्टि को भरपूर नाम-आम (b_am )
आधे तो जैसे तो गोदी का भरपूर विनाश-व्या-कारन हो गया
तुम्हारा भगवन मूर्ति के अंदर ख़ाली है
gut मईया आधे की आँखों के अंदर ख़ाली रखने वाली रखवाली है
तूतू में में की दुनिया पूरी जेल
एक चोर एक सिपाही का भरपूर खेल
भरपूर आधा इधर उधर पूरा मेल
एक बाहर भागे एक अंदर रेल
अंदर का बच्चा वारा फेल
अब भागो आई सारी बूंदियो की
मईया का gut _op ख़ाली a-वेळ
निराली छाया बांधे ख़ाली gut गोदी ऐल
पिछले द्वापर युग में कृष्णा का
जन्म जेल में हुआ ता
अदि-नाग की छाया ने मईया की
गोदी अंदर पहुँचःया च
इसी लिए अंदर का ख़ाली बच्चा ही
gut गोदी का सारा अर()माया मा
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