गंजु

नन्दु तुम्हारे अंदर के किले की कला ख़ाली बंधु है

चारो और का ख़ाली यश भी मन मुघ्द ख़ाली संधु है

तो फिर गोदी की गंध भी ख़ाली सुगंध सिंधु है

आधे आम तो ख़ाली गेंदा गंजु है

समय का समाया

ख़ाली समय का समाया क्या सिखाया

wit()in is _till ti()e

gut मईया के गोदी के प्यार ने

तुमको ख़ाली इबादत नहीं सिखाई

इतनी सी भी

लाहनत है तुम्हारे भरपूर पर

गम – शुद्धि

आधा-आधे की सम्पूर्ण शुद्धि में

रात-दिन गम हो हाते है


आधा गुम हो जाये तो भरपूर बुद्धि

(जिसे अंदर बैठना नहीं सीखता)

और अगर आधे गम हो जाए

तो कत्थक-कली सो सिद्धि


ख़ाली नाट्य ख़ाली वृद्धि

गप्पियों

आधे का ख़ाली दिल (_il) लूटना है

कोशिश को ख़ाली कशिश से जोड़ लो

गम गम गम

अब देखना आधे कैसे सफ़ेद-काली

गप्पियों को गम करता है

अंदर-बाहर

इधर-उधर

जब आधे का स्वयंवर रच रहा रे

तब कहा थे

आईने में कैद करके रखा है

बिंदी गवती

gut गोदी के अंदर के

आधे सांसो को भूला कर

तल की सास का भरपूर आधा

_m-art समझ्ते है

अंदर-बाहर

इधर-उधर

अब छांटी तो होगी ही

कितने जनमो के अंदर बिंदी गवती

gut मईया के ख़ाली डंडे पर भरपूर

शक हो रही है तो कश कर को

सास को तूतू में में को भू-लेन

भालने में आसानी

होगी अब

भरपूर बाहर की तूतू में में बहुत गवाती

अब घर के अंदर की ख़ाली मेहनत