टिके कान

भरपूर नाम बुंदिया बद का इम्तिहान

सांसे टिकने ना दे ज़मीन पर

टिके भारी इंतकाम

न लाये कोई ख़ाली मकान की पहचान

लकीरे है भरपूर लाभ की लम्बी लगाम

अंत कल कालीन

अब बतिआयो

कलयुग का अंत कल होगा

के आज कल भी देख गया न

नज़र गिराया हिसाब अंत भी

न जाने कल क्या होगा

नवाब का राज

आज तो शुरू करो

ख़ाली अंत का ख़ाली साज़