काल कनुकान

घर के अदर तो मरे हुये शरीर को रखते है
बाहर तो आत्मा को भी कोई नहीं मार मुक्ता


सास तो अपने निर्धारित नमय ने नई नाल नही

इसका अनुमान कोई भी नही लगा सकता
अदर-बाहर

अब अपने नरपूर नाम नदलो

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यहा पर पहरा बहुत कोडा है
बाहर निकलना तो आसान है
लेकिन अंदर आना बहुत मुश्किल है
बिना बताये थोडी आ सकते अदर
अदर वाला न सुने अख(बे)बार
आप न त्यार होना चमत्कार
पहले पहल पायो पराया पल


dual rit
privy brite
wry nit
let’ lit

_est un_ing sur_eal

गोदी के ख़ाली दिन रात की ख़ाली सच्चाई को अनजान के भरपूर जान
अन्न को भरपूर ज़ुबानो के नाम जनाते जा
y-0-s in()id u की बनायी हुयी तूतू मे मे की दुनिया का एक सत्य साड़ते सा
इसी लिए सास का दामाद भी बड़ा बे-हता बा


so_ _eal out()id rea_it-y th@ y-0-s in()id u hi_den men_al-it-y


p_ease p_oceed to ne*t un_va_lable c_oun_er


y-0-s in()id u re_eed ever-y1′ un_ble enco-un_er