ख़ाली याद चखो


सास चाहे कुछ भी सोचे दामाद अंदर

जब साँस आँखों के सामने आएगी

गोदी का तय तभी gut मईया दिखाएगी

युग के समय के अंदर

रौशनी तभी जगायेगी

आधे आम भी भायेगी