ख़ाली या भरपूर

ख़ाली आत्मज्ञान साँस के भीतर से सृष्टि गोदी के अंदर ही ख़ाली समाता है


बाहर की दुनिया का सीखा सास के अदर को भरपूर अपवित्र मे-ला ही भाता है

ख़ाली आँखे

हम मईया की ख़ाली आँखों में ही

काले-से-सफ़ेद-से-काले होते है


गोदी की आयने ख़ाली ही मजबूत होते है


सृष्टि को संजोए भीतर की धारे ही

ख़ाली साँस होते है

अनंत रात

गोदी के दिन का आधा अंत होता देख सास को भरपूर चैन मिलता है


लेकिन दुनिया मे किसी एक का अंत अदर नही रात रोता


तो लय बाहर भार भरपूर भोता


और
अनंत रात को कभी न छूता