अंदर-अदर

गोदी के संसार के ख़ाली अंदर
दुःख-सुख तो बुँदियाँ ही दिन-रात पि-रोए
पाओ पोए परे पट खट खट खोए

बुँदियों को ना मिले मझधार
गोदी में तैर तहा तरपूर तिरदार
काहे का कंधे कुम्हार कहार
निवाला अदर नीवा बाहर बीमार
नि-ठले ठयू ठहरे उ उतरे उठाव

न आली

दुनिया के सडपूर स-सुराल मे

गोदी का माएका अंदर ख़ाली

आधा रहे जरपूर जाड़ा जय जोड़े जाली

आधे नी णमाधि न नोड़े निगोड़े नाली