आधे ब्रह्माण्ड की gut()गोदी के ख़ाली घर में रहता रा
जिसके अंदर के रबल()बी बही बांके (न) बाँट
बाल बी ख़ाली दायां अंदर छांट
आधे ब्रह्माण्ड की gut()गोदी के ख़ाली घर में रहता रा
जिसके अंदर के रबल()बी बही बांके (न) बाँट
बाल बी ख़ाली दायां अंदर छांट
घर के अदर तूतू मे मे दुनिया की एक-एक _i pro_ile हो तो
सास के दामाद की हर एक _ile की अदर नही आधा जमन्न घुट्टी घुलती घही घा
गोदी की हर हर ख़ाली बुँदिया miss_le
सासो का भरपूर e*ile
tor_e-do re()ad 2 _ire in()id i_le
मनुष्य को तूतू मे मे की दुनिया का एक सत्य तो भरपूर प्यारा पा
और साथ ही अदर भरपूर गाठो के भरपूर तत्व का सत्य भरपूर बुरा बा
स-तुलन इधर-उधर कायम का काया कूर्ण का
बिना अदर सास को मारे बाहर की चिता का दिखावा
तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक मे हज़म होता ह()वा हा प()नावा
सास को तो दामाद भरपूर चलाना चाता
_ook man-y _ow bo()dies _ar _ooked to on wor_d _loc_ing every1′ loa_er
a y-0-s _ife in()id u is ever-y1′ s_ag-nation
th@’ ri_ gro_t_ is 0 for _old ro_t()en
w_en u _ar _haking t_ings up, _an u _ow mov do_n ever-y-thing
y-0-s in()id u _ach u s_ep out()id u comfor_ _on
u loo_ing _ack in()id th@ un()not let y-0-s _ee pres()nt th()ough tha _an _ove for_ard
u _an _et y-0-s use s_all for out()id _ig chan_e 0 in()id th@ un()it _ang
chan_ing _ear is 0 cons_ant for no()mal _ill _top u in()id th@ _ear
it _ill 0 _et u fi_ure y-0-s in()id u _ar bus-y com_laining ne*t _tep
u in()id door_@ _ill we(illage)com chan_e 0 _an _top out()id _ang
y-0-s in()id u _ar _ever too _ate to _et u s_art in()id _ate
y-0-s in()id u re-ali-ty is clai_ing chan_e in(out)id
for ever-y1′ ever-y-thing b()inging in()id u _ang
& cons_ant u re_ain in(out)id con-sis-tent ef-for_ _ol _ain
u _av it in()id pant_y for _ure it _ill _ik y’all
()सौत का e_ail आता एख कब-रो का भरपूर पर-व-वाह पारा घर अंदर पड़ता
तो क्या बाहर दौड़ने दरता दारोमदार दड अदर डार भरपूर भडार भरता
डो डरते डाहो डोडो डा डाडा डड़ा
जान()वरो को बाया बिद्या बही भायी
तो बनावट से ही काम चाललो चायी
भरपूर का नही गुजारा बिना भायी
जरूरी है सास का दामाद एक बायी
इतनी छेड़खानी कच्ची कही प(क)रे-शानी
इतनी न अदर ढेरो बाहर भरपूर निगरानी
अदर दाना पानी भूले ख़ाली आम-निशानी
भरपूर आखो यार-शा इधर-उधर से उठाये भ-ग्यानी
गम है किसी किसी की भड़ास मे
सास अदर बाहर एक जाम
न भरपूर भाये भारी भरा मर-दाम
हाय आम हाय आम
तू का भरपूर तडा
मे का मरपूर मडा
जो बीच मे भरपूर भडा
दोनो दा दडा आ अदर अडा
दुनिया दी दुया दा दिया
जाचे जड़ताले जरूर जेक जिया
न दवा न दया दी ख़ाली निया
अदर ही भडकाये भय भा मिया
भरपूर कब्र का घर व्याम व विया
जरूरत की चार दीवारे
भ्रमशान का शम वारे
जो जाये अंदर ख़ाली ख्यारे
तो नज़र न-य धीतर धर धारे
दिन रात गोदी को सताया
सास की सौत साडा साया
एक बात भरपूर भरमाया
अभी नही आया दिखा-वा दाया
a y-0-s in()id u ri_ _no()le_ge _as no _espect for le_t()ver ac_now_edge
_oggy_ag in()id _otten _ag
_ill _eed to_or()ow _ize of _ap _ag
an er_ of y-0-s in()id u _ar
e_er_ing _ate un_nown _ate
de_rading va_u of _ol r@
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