हमें तो करनी है गोदी की ज़मीन हरी
जो भी इसमे आया करपूर करमो का कमाया
भरपूर भय से भूरा भाया
हमें मोह-माया के ख़ाली ने समझाया
अब आन से है लड़ना घर के अदर झडना
कैसे कहे कितना कम कहा करना
हमें तो करनी है गोदी की ज़मीन हरी
जो भी इसमे आया करपूर करमो का कमाया
भरपूर भय से भूरा भाया
हमें मोह-माया के ख़ाली ने समझाया
अब आन से है लड़ना घर के अदर झडना
कैसे कहे कितना कम कहा करना
_his h_use is fa_ing _est
so u wa_ch su_set ever_dae _oing res_
& _id 0_ing in()id ar_est
ever- -thing bec_me 0_ing _a_it for ever-y1′ t_ing
ju_t wei__ing
_an u dis_volve ever-y1 in()id u
wit_out ever-y1′ ever-y1-t_ing out()id _ew
eie c wit_in ()i-ew
u _ar _trong har_be_roc_ _afe
let’ s_art in(नर)id _afe
w_o e_se 0 jo(y)in _afe
ever-y1 in()vi_ed ho_ _a_f
दो लफ्जो की है गोदी की ख़ाली अहा-आणि
इसमें न कोई राजा न रानी तोपफानी
आधा दिन ध्यानी आधे रात रूहानी
दिन रात आसमान आम भवानी
आ लेले ख़ाली खज़ा खवानी
बिना सोचे ही भरपूर भानुमान
गोदी के आधे का ख़ाली ध्यान
दूयिया के अदर नही है निशान
क्यो कही के पास नही है
ख़ाली ज़मीन का आसमान
आधे हरीआली गोदी आन
all ni_ 0ing hil_
in()id l&min fu_lfill
get s_eep h&sum 1 _ill
_ae t_ank y-0 y-1 ill
गोदी में आधा ख़ाली मासूम दुसरे मासूम का
क्या जडजोर जुबान चला के शिकार करता
जो एक काल का भय भरपूर सताता
जीकर ज़ुबाने जाते जाम जमाने
भरपूर शक की नज़र नही जानती
गोदी के हक की कदर
आसमान नही गिरता जमीन नही रूकती
तब तक ख़ाली रात की रूह रही भटकती
एक-एक सास की खबर लेगा
काल का हिसाब किताब करेगा
गोदी की मिट्टी के लिये लड़ेगा
दूयिया जमीन जर्रा जर्रा डरेगा
a _or_d _as no g_oun_
& tim is ru_ning _out f_own
to kee_ up _heck wit_out to_n
अब गोदी तो है नही यहा किसी के पास
कहां आए आधे आम आस
चैन की ख़ाली साँस (सब को दिखावा लगती)
लेना कितना मुश्किल है भरपूर घर के अदर
(तुम) सोचते हो की (मेरा-मै) तो अकेला हू (मुझे) नही फरक पडता
(मेरे) पास सब कुछ है इस समा(दा)ज से दूर रहने के लिये
घर बगला गाडी (बीमारियो से कमाया) पैसा
यह तो अच्छी बात है
समा(दा)ज की तूतू मै मै क्या
घर के बाहर पैदा होता है
यह अकेला कौन है
दज्जिया दाज दिकलाये दडी दात
You must be logged in to post a comment.