no_ तक

सासो के दामाद द्वारा की हुई दुर्गति को कब तक
दूर की भरपूर गति भारमयोगे और अपने अदर
एक-एक दर परपूर पायोगे या सरपूर सरायोगे

0 _ince bi_th or else before hea_th
i do
0 _av _ime
2
0 _ess _ime
ever-y1-t_ing _ran-s_orm in()id 0s _y-me

y bo_i _hang for y-0-s
_et in()id u de_ange
_eep _aeing
_ar vi t_ere _et 0 chan_e

on-ly _reason y-0-s hu()man _av 0 evo_ved
for u _eep _aeing y-0 _oint un_no_n yo_ed

ख़ाली सांसे

सृष्टि गोदी की ख़ाली ज़मीन में

आत्मा(तत्व)शक्ति की जरूरत ख़ाली सांसे

अंदर-बाहर धहलती धारे ख़ाली झांसे

इधर-उधर अटकाए ख़ाली फाँसे

टेक टिकाएं दाएं-बाएं ख़ाली दिलासे

_ach 1

y _eep _aeing i do 2 u _uffer _ach

adha ja_am _uffer up/do_n _uf_er

for y-0-s in()id u _ar do(er)ing _eep

ever-y1-t_ing wit _ol _ear p()ing

in()id _ear for g_eed 1 _ear

—————————————-


y-0-s in()id u he-al_hy
0 _ar _ol we(illage)al-thy
on wor_d in(out)id s_eal-t_y
0 no loo_e wan_er _is th-y


भव्य भूल

दुनिया के नेक एक को किसने देखा चुलु भर तूतू मे मे तानी मे भरपूर डूबते डा
जरपूर जुबान जे जेखा-तेखा तभी तो तीखा तरपूर तोखा

गाठो का अदर अनुभव
ना देखा दिन-रात का भरु भरपूर भव

बे-तुके सवालो की जु-बान बिछाये अदर-बाहर जरपूर जाल
न तोड़े तिसे तक तदर तरपूर ताल

ख़ाली खठ खठ

०५=५०

ख़ाली चठ-बठ

ख़ाली आधा जन्म सृष्टि गोदी के अंदर दिन आधे अंदर रात

ख़ाली साँस n()w to()al आधे अठ अट अट

० नव-शिशु ५ इन्द्रियाँ _ut गोदी ख़ाली खट खट

काल के ख़ाली पुतले काला-काली कुल कठ कट कट

आँगन में बलाएँ बूंदियो की बठ बट बट