येसा भी कभी हुया हाया
आखे उठी धड गिरा गाया
दूयीया की भरपूर कबरे खि()ली खाया
भीगी भी ले के लुका लाया भाया
Category: hohm
नम()स्ते नम()स्ते
हसरत है की कटे करपूर कस्ते
सोने जैसे नसीब हो हारे हस्ते
कही तो निकले अदर ही बस्ते
भरपूर साथ बाहर नस्ते
मैले मस्ते इतने सस्ते
दगी दादर यक्सप्रेस
घर के अदर नही उड़ती धौस चलती
और बाहर वालो को डराते पूरी पलटी
खडे हो के नही रोते भरपूर करमो को
और नही बैठ के भिगोते भरपूर धरमो को
भाव के भरपूर बहादुर दुरगति दगी दो
तो फिर जागते कब घर अदर घाव दुगने दो
कहा गयी कहा आयेगी
मचली मन की रानी है
जीवन प्राणी का पानी है
प्यास जगायो घर भुलायेगी
बाहर घर निकालो अदर मर
जायेगी
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le_ li_ lo_
li_t the_ir spi-rit
गिला डय
आधा जन्म को नया नाम मिला
एक ही दिन मे भरपूर मैला खिला
गाठे निखरी अदर छिला
गायी गयी गिला जय जय जिला
मैने तुम्हे आ(या)गया देदी है
तूतू मै मै को बाहर डूबोने की
तो फिर अदर कौन डूब
डहा डय
1 or 0 _oug_t
in(नर)tia ali_n
1s & 0s
_ol in ro_t
out a_out

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