
a tes_


a pro-f_und inनर 1 _hang
&
ro_ling 0s in()id wit_in
ho_sum 1 ran_
y-0 @_ir _atch 1 mo*ie de_ir
le_ us _av _um fu_ wit_ it is hol_um ever-y1 of us
अब गोदी का ख़ाली आपा-hiz
तो दूयीया की एक-एक सास का इधर-उधर का आपा
खारेगा ख़ाली आधा जन जन अंदर नापा
बहार के मरे हुए को कैसे मारते है
क्यो कही कुनते को
जैसे अदर के फिरे हुये सर साडते है
मुये मरे हुये अपने आप वारते है
कैसे कहते करते को
no _eet no g_eet
adhe is to()tal
em_tee fee_
भरपूर ड()र को सुरक्षित करके लोटता है
आधा जन्म सासो की एक दूयीया इधर उधर
बसने के लिये
ever-y1-thing co-me to _hose _ho _ar wai_ing
_ar u 0 in()clu()ded out in_ading
0 _hang *citi-ng ran_e r@ing
an _elf-re()ali_ation of em_tee in()id 1_ess
to
a gut in()id em_tee 0 bre_ath
कल के समाज के मा-बाप अपने बचो को अपने
समाज के सिखाये हुये एक नज़र से ही देखते है
पर क्यो कही की करे
घर के अदर की गाठो का
एक-एक आज के समाज का सिखाया
भरपूर _ach fa_
or el_
ever-y1′ in()id 0s _eep
b_ea_ing re_ring in()id _it ‘
pa_s s-a_m _ag
दिन उजला नेक
क()मो का इधर-उधर का किसब-हितब
किसे याद है सही साल तही ताल
ਨਗਾ ਸਰ ਲੈਕੇ ਪੈਰਾ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਤੁਰਾਨ ਲੈਨ ਜਾਊਗੀ
ਤੇ ਜੂਯਾ ਤਾ ਟਗਿਆ ਟੀ ਟਹਲੂ ਟੀਯਾ ਸਾਰ ਦਿਨ
ਸਫੇਰੇ ਸਫੇਰੇ ਸਫਰ ਸਿਰੇ ਫੇਰੇ ਸਾੜ ਸਾਦ ਸੇਰੇ
ਕਿਊ ਕਹਿ ਕਲੇਸ ਕੁਤਰੇ ਕਰ ਕੁੜ ਕੁੜ ਕਦੀ ਕਤਰੇ
ਤੌਰ ਤਿਲ ਤਾਲ ਤਾਹੀ ਤੇਰੇ ਤਤੜੇ
मीठे स्वाद का तो भरपूर पता है
यह नही पता अदर कितने समाज
के रिवाज का सवाद सिरो
सले सातो सी सत्ता साज
१ सच मीठा बाहर अदर कडवा क्यो कही कोटा
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