save soil

तर-सती ताखे स-लाखे

सूखी धरती पे नहीं उगेगा अन्न

दूयीया के एक एक की भरपूर

कोख भी सूखी _a_ch भूख भरेगी

घर के अदर जन न भरपूर बाहर जन

जाल बुनते

कौन से समाज के मा-बाप को अपने
घर के अदर के बचो से उम्मीदे आती है

हाँ अंदर के बच्चे तो कभी बाहर निकलते ही नहीं

किसकी कैद में ही आधा जन्म जलते