not_ing is to_al-li tra_n_parent
ever-y1-thing is _er_orming in()id p@ent
or ho_sum _it-w_ong _ae ren_
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(i)do u _av s_ill _ag on आधा जन्म
2 re_urn 0s tra_ma 2 re_lace
4 1 _ain सोमा
sea_ch y-0-s c_edit car_ kee_
u out of y ()sight yar_
गोदी की ज़मीन की मिट्टी झाड़ो
गदी न हो जाये चमडी नही
उझाडो असुरो की चिट्टी
आधा जन्म लुट्टी
सेर के मूछ मे स्वा सेर
किसने कमाया किस्मत का केर
अदर बाहर मेहर मा मेर
निगला नया नाम नर हनेर

a dot in()id _ai_ing for dev()lop()ing
a gut surface()all in()divi_ual to _each
mi_d-fu_l_ess for dot tar_et
दिन का खाया रात ने निभाया
सफेरे साया दिखाया भाया
अब क्यो रोदे राम राया
पीठ पीछे सब ने खाया
तुम तो दामाद के घर की चार-दिवाली मे कैद हो
तुम्हे क्या नजर आती बाहर की बट्टिया
बजर-बट्टू नवाब के वैद हो
_ack 2 _qu_ar 1
देवी मन की बंद आँखों से सब देखती
इसी लिये गोदी में दिन दहाड़े
खुले-आम चोरी चोरी चाढे
रात कहा रह आयी आडे
तर-सती ताखे स-लाखे
सूखी धरती पे नहीं उगेगा अन्न
दूयीया के एक एक की भरपूर
कोख भी सूखी _a_ch भूख भरेगी
घर के अदर जन न भरपूर बाहर जन
कौन से समाज के मा-बाप को अपने
घर के अदर के बचो से उम्मीदे आती है
हाँ अंदर के बच्चे तो कभी बाहर निकलते ही नहीं
किसकी कैद में ही आधा जन्म जलते
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