y-0-s wa_t a_l _ook @ chi_d_ood
wit_ 1 adu_t _ies for ys-lf en_er _un_y t_ic
& yi_es..arg.. pa-us pies
y-0-s wa_t a_l _ook @ chi_d_ood
wit_ 1 adu_t _ies for ys-lf en_er _un_y t_ic
& yi_es..arg.. pa-us pies
क्यो कही के क()रो मे
तूतू मै मै की जूतियो
जा जायज जाज जय
मा-बाप को क्या
सारा समाज सिर
सुदर सारता सा
तुम-हारे मूह से पहला शब्द शिकस्त शाकाल शिकला
_un-ty @tac un()कल
फैला फिसला फूला फिसला
कलयुग का कार(गार)नामा
जब अदर नही पहनता ऊपर
तो बाहर क्यो दिखाये निचे का घर नगा नुपुर
क्यो कही ने पैदा किया
b_a(बर)bo_s
बाहर सामने आने के लिये अदर का बहाना
घर के अदर किसने सिखाया
हल्ला-हेरि हाहा ह(प)ढ़ाया
मा-बाप निशाना भरपूर बनाया
अरे देखो आधे कब्र से उभर आया
आधे अंदर इज़्ज़त क्या होती है
भरपूर पैरो तले रोलती
ख़ाली माँ की गोदी की मिट्टी
t_ink car()fu_ly be_or u let y-0-s _lay
1 _or_d _am & in()id 0s _ham s_ar
1 _or_d’ va_loos of 1 pri_ri_ies
_ho le out_pok c_oss a _in
_hi_ch t_ing 0 go y-1 _ae
0 _eat _ead ho_se
0 re=ent b_ing le_t out
वास्तु शास्त्रा के अनुसार
सृष्टि गोदी के अंदर
हर वस्तु को मोल
अन्न के बराबर का बोल
और असुरो के नसीब मे
दु()रूप-योग का भोग
भुलाया अदर का भोल
0_ing _ess t_an su_1
wan_ mo_ than_ 0_ing _um
0_ing is in()id a_g_ry _um
पीठ पीछे क्यो कही रख के
सूर्य के सामने मोह का मूह रख के चलते है
तो आमने-सामने कहा मिलते है
सूर्य पीछे पलते पा
सृष्टि मईया की गोदी
न तो देवो की होती हो और न ही असुरो की
आधा बाहर कहर और आधा अंदर जहर
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