मुरझा गयी कंस की कली
हम क्या करे रात न रली
आधा ढेर ढाल गली गली
छाया छे अधेरे डली डली
वीरावती कहती अपने बच्चो को
अब
काली कुण्डी कगालो काली
मुरझा गयी कंस की कली
हम क्या करे रात न रली
आधा ढेर ढाल गली गली
छाया छे अधेरे डली डली
वीरावती कहती अपने बच्चो को
अब
काली कुण्डी कगालो काली
शाति बायी को बहुत गरमी(जाज) जगती
ठडी ठडी क्यो कही कडक कुड-कुड कुडती
अरे एह आने आ अहा आ
आधा अंदर आधे बाहर
बिंदी बिसरी बिली
गोदी से गहर गहि गाता
तूतू मै मै से क्या सिकता
बिना बोले वास सस्ता विकता
घर घर के अदर रास रुकता
चुप चाप रखा है या खडा है
अदर के बाहर
यह क्या टाग रखा है
w_a_t it ta_es is
u in()id y-0-s _ill w()ill-age
2 _e@her 1 _or_d
_ut s_or_ach
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आत्मज्ञान की अदर हत्या
तूतू मै मै का बाहर सत्य
hom a_ay f_om hom
ri_ & _it out _oam
_rong in()id _oam
far out inनर _oam
पैदा होते ही आत्माज्ञान की हत्या
घर घर आया जन जन सख्या सत्य
आख खुली अदर वास वस्या
मनाया भूल-भयी भस्म भस्या
दुयिया-समाज मुक्ति
an em_tee _ut im_un_tie
0 en_o_ed in()id @ all
for no 1 _as ho_
priv(y)il()ge
in(out)id सख्ती
जन जन बाहर लोटा दुयिया अदर घला घोटा
गला गोटा भला भोटा
तू बूढ़ा मै बचा शाह
सौदा समाज सच्चा साह
गन्दगी अदर आशा नि()चाह
वह वोह वारपूर वाह
तूतू मै मै ने निसने नाता नोडा
समाज सा सुधार अदर निगोडा
जहा जहा तूतू मै मै की जुबान वही
होती प(द)ढाई जन जन की पहचान
आप ने हम से शादी करके तुम
पैदा किया तूतू मै मै का समाज
_eave no t1 un()urned
y-0-s in()id u mo_ning _ice
(he-we-ste)al-thy yie_
_y ni_ tu_ned th_ice
wit_out o_er_ooking
आधा जन्म hoo_ing
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