भरपूर सपने सच सुये
रातो के भरपूर जग जुये
बाहर भरपूर दिन दूजे डु()ये
अदर अधरम चाद चुगे
भरपूर सपने सच सुये
रातो के भरपूर जग जुये
बाहर भरपूर दिन दूजे डु()ये
अदर अधरम चाद चुगे
जो सासे रोक अदर रुकता
वोह पूरी दूयीया का डुबो
gut अदर खाली दौडता
किसका साथ चूमता
यह दूयीया की सासे क्या लिखती है
हम बने तुम बने एक दूजे के लिये
तो ख़ाली बल मत
हम एक है — तुम दूजे हो
तुम नक-भी नेक नही नो
not th_oe ys-lf in(नर )2 1 _it
—
a b_eat_ing is a war_ior
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@t_act min_ful clou_
let’s la_y lo_t
तूतूमैमै जुबान की कीमत
chan_ing out 1 ins_ant
not in()id s_able cons_ant
_ol out t_ouble in()id ten_
u pae al1 in()id _ent
not _ile s_ent
s_or-y of in_an
kee_ sin_ing y _an
y-0-s in()id g_in
out-p() _an
तूतूमैमै के भाग्य का बाटा हुया
भग()वान
भी पूरा पा अदर आन
सारा कब खाली होगा
हान
is y1 b_ing not well
सात फेरे तेरे मेरे
एक इधर आखरी उधर
बीच मे गाठो के बसेरे
दिन रात भरपूर हनेरे
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