महीं मानते

तुम बिना जाने घर के अदर

आधे के साथ रह-गुजर सकते हो

तो जान के भी क्या करोगे

घर के अदर गोदी नहीं होती

और यह गोदी मे बिना जाने
कूडे का ढेर किसने
रगा रखा र

शाति शनि शाह सुनो

देखो दात देह दाह

इसकी जुबान की मा है अग-अग-करे-जी
इसके पास नही है समय सार सरे सर-जी

हमारी मईया की गोदी मे हमें नहीं
kit()नुयो की कही बु(बू)लदी चा(क)हिये

नही सुनना तो तीन दिन
(चोर-चाद) बाद बनाना

यह शनि देव की शाति
के लिये लाडे लडते

म-गल-मय मडते

लात पा(ला)पी

तुमने हमारी मरी हुई लात पापी पेट पे मारी
तुम तो हो घर के अदर बीमारी
समाज की यारिया प्यारी
एक su-दर क्या क्यारी

तुम तो करते घरो के अदर बुँदियो का ब्ला()कार
और बाहर करते वास के घरो का शिकार
खुली नजरे न हटे बडा मै घर समझदार

बेजुबाँ नही डालते गोदी में जुबान
बाहर निकालने का गंद

ठा ठा

मौत के मूह मे झोकते
तूतू मै मै का समाज क्या चौक-ते
घरो घडघूर दस्तक नही देता मोडते
एक एक मूह मे जय ज्योते


तुम तो हो वास की काली अधेरी रात
मे उडते रहो ठाठ की जात