उगलियो की नोक पे भरपूर चुगलियो ने
चुग-चुग के ऊगा रखा है भरपूर
बीमा(या)रियो का एक युग
उठेगी उगली भरपूर भरेगा
रोगी का भोगी जब
उगलियो की नोक पे भरपूर चुगलियो ने
चुग-चुग के ऊगा रखा है भरपूर
बीमा(या)रियो का एक युग
उठेगी उगली भरपूर भरेगा
रोगी का भोगी जब
_og e@ _og wor_d
gut na()ure is sp()eading
y in()id u for-m_ation
no-un
ever-y-th()g _eep _oing
1 done un()not _eed emptee
in()id un()1
no 1 _ae for gut nature
godi’ emptee
un()1
be_are
gut nature
_ive bus(y)es
1 _ol _pace
y-it all un_old na_u-rally in()id
u un()not _no a fo_d wai()ing
un_oing c_ear_y
भरपूर _ub-lic to bec()me
y भरपूर pri_ate _if in()id u
कौन सा मायी का लाल सुलाये अंदर काली
भूल जायेगा रात की भरपूर वाली दिवाली
न मिले ख़याली न धौला हिम्मत सवाली
असुरो को मा-बाप कहते भरपूर शर्म नहीं
आती जो खुद के आधे बच्चे का गला
घोट के आधा that which is pa_t one
_eep _ive एक ऊंचाई के लिए रखते है
भरपूर को पेरो पे खड़े होना है
(क्यों खड़े होना है जब आधे
बच्चे तो गोदी में बैठे रहते है)
गोदी का अन्न खाने से बीमारिया लगती है
और बीमारिया का सफाया
करने के लिए भरपूर तल की कमाई चहिये
आधे बच्चो को पालने के लिए
भरपूर कमाई चाहिए
अब भरपूर तो घर लोट(ता)ा नही
तो इसका बल मत ईंटे भी पक्की
साथ ही पलटी है
कच्ची अलग
y in()id u @_ar
भरपूर _had_ow_
असुरो से पूछो भरपूर क्या होता है
i _av nothing
i am nothing
ever-y-thing in()id
_not thin_
You must be logged in to post a comment.