कब्रो के अदर शोर को ऊचा मचायोगे
तो मुर्दे भी अदर भरपूर
भाव भ-भरेगे
कब्रो के अदर शोर को ऊचा मचायोगे
तो मुर्दे भी अदर भरपूर
भाव भ-भरेगे
तेरा-तेरा
जुड़ गया साथ भरपूर से भरपूर
भालो भा-रात
शीशे के सामने आते ही भरपूर
गदे गूट गपड़े
तुम तो भरपूर वर वारे न्यारे
हम तो निहार ही नहीं नाय
i fo_ _uses
to_let me()oar _uses
a_m()tea tree
no()thing _eave
w_at’ _appening que()tioning a hat’ _@
भरपूर का भय भरपूर भाया का भरपूर भय
u too on fo_
ख़ाली माँ को नहीं जगाया
जगाने को भरपूर भाया
गाने गाने में भरपूर जग-माया
ख़ाली शक्ति में नहीं समाया
आधे ने नहीं रुलाया
भरपूर को तो भरपूर ही चाहिये न
तो देदो-लेलो कि(जि)तने भरपूर
इक्कठे करने है करलो अदर
पेरो का भरपूर तो कब्र में ही रहेगा
कोई भी सास का दामाद हो
किसी भी भाग का आधा जन्म हो
व्यस्त हो सजाने में घरो के भरपूर को
किसो भू……………..ल गये
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