n-ever s_eal _heat vile _t_nding _ack of adha c_alf
Category: hohm
का-पता
तीनो लोक काँपते है
खाली वीर के आधा-आधे महा आम से
तूतू मे मे की दुनिया मे कोई नही एक का-पता
(काला-पता हो गया)
re_urn
is wiw o _ull re_aining in()id _ise _ull
-या
क्या खोया क्या पाया
जो न सोया ख़ाली न बोया
भरपूर ही ढोया ख़ाली न धोया
de-serv
y-0-s in()id u de_erve to be t()eated with in()id res_ect
——
a respect is to ob(edient)serve & obea
(quiet emanating wiw o rae)
c_ose eie qu_etlee
in(out)id emp()ee hae
मंथन-निशानी
असुरो और बूंदियो के बीच में मंथन
सृष्टि गोदी का अमृत पूर्ण समर्पण
काल रात्रि है मधानी का सारा दर्पण
और आधे बैठा है निचे ध्यानी
नीलपंथ अभी हुआ अंदर का ज्ञानी
कब ख़तम हो कलयुगा की भरपूर निशानी
_प
आधे की ख़ाली आंखे श्राप है
अपवित्र असुर अदर के बाप है
इधर उधर के भरपूर आप है
बिन मा के बचे अदर के पाप है
आधे की ख़ाली ज़ुबान की साधना के अ()लाप है
एहसास-विश्वास
जिसको सृष्टि गोदी की ख़ाली चुपी का एहसास नहीं
उसे अपने अंदर की शांति के परिश्रम का ख़ाली विश्वास नहीं
सहज
भरपूर सास के भरपूर दामाद के पास सब कुछ भरपूर है
बस नहीं है तो अच्छी in()id gut ख़ाली प्रकृति
जिससे सृष्टि गोदी के सुर अंदर ख़ाली सहज रहते है
_जा _जा
सृष्टि गोदी में भरपूर ज़ुबान के ताले की चाबी को रजा नहीं मिलती
और फिर तूतू में में की 1 दुनिया तो भरपूर सास के दामाद की सजा पर ही टिकी है न
तो फिर काली माता की बाहर दरशाती लम्बी ज़ुबान का कोई लेना देना नहीं है गोदी से
यह तो भपूर दुनिया की बनायीं हुई दाती है जो भरपूर को असीसे देती है
8 _ill_on धढ़ कैसे टिक गये काली माता के गले में
और भरपूर का निवाला गले से नहीं उतरता

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