फ-फा-फे-फु

फिक्र को धुये मे उड़ा दिया


सबक भी न पड़ा भरपूर भहा भया


अदर ही ढूढे भरपूर जि-कर का जिया


फीका फडा फाड फे फुरा


आखे हाय खड़े खो क्या करोगे पिया

-रे

दुनिया मे तक()रीरो के घर लू(लु)टते लुटाते ला


बाहर तो कालरात्रि के चरचे चाली च


बाहर ही गिरे तारे अंदर तो बूंदियो के ख़ाली खारे


गोदी में उतरे खैर के खूब ख़ाली न्यारे

ख़ाली -खत

असुर भरपूर ताकत वाले वोट वा
अपनी अपवित्र आदतो से गोदी मे ही भरपूर तखत भरपूर भखते भा


देवो की अखंड मासुमियत सृष्टि गोदी में ख़ाली माँ

की सिफ़त के सदके सारा सार ख़ाली पवित्र पा

ख़ाली मा()मियत


अब क्या आधे की ख़ाली मा(न)सियत पे दिए ढ़ालने ढाए ढा


अ()ख़ना दिया ख़ाली है कि दूर मख्मूर

पर है कहा ख़ाली ि()यत नूर


आधे को सा(आ)मने आने की जरूरत तो ख़ाली खा अंदर


आधे न तो आगे न पीछे


न ऊपर न निचे

न इधर न उधर

धार ख़ाली भीतर ही भू-लाया

शुभ-लाभ ख़ाली गोदी सींचे सुर

ਡਾ-ba

जब सास के अदर के काम कम-जोर है

तो बाहर भरपूर काम ढूढती आखे भरपूर मु()ड़ा _or है


o babi baabi baaaaabi

बच्चे क्या शरीर होते है इधर उधर उछाले अदर उछलते आ


भरपूर भछाल भय

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ਡਗਰ ਅੰਦਰ ਹੀ ਡਡੇ ਡਾਇ ਡਾਡੇ ਡਾ