(ह)

आधा मरन की मैल
जिधर जन्मे जरपूर जैल
घर गी घूरी अदर-बाहर घुसैल
इधर उधर पाने पाली पा पैल

तूतू और मे मे साथ-साथ मिलाप माप
ताघ तोर तलत तिधर-तुधर तूर ताप
होगा क्या एक-एक फिर भरपूर विलाप
बजेगी बाठी बजायेगा भरपूर भाप

भ()हाये

हमारी बिंदी सासे छीन छेती छा छत छे छुड़ानी छुया-छूत छडे छा
येसे ही तो ज़िन्दगी की बहार इधर-उधर भरपूर भसीन भरती भा


y-0-s ने ज़िन्दगी को जीत जरपूर जिया और अदर
तुम-हारी गरपूर गाठो गा तूतू तागा तिया

सासो के ज़माने का दिन-रात से सरपूर सनेहा लेना-देना
न लोटाये भरपूर बहाने बा भिखाना भहाये

जो जा

आधा जन्म सोने के लिए सास के दामाद की तूतू मे मे ने जन्म
जाली जय जुनिया जाला जहेज जारपूर झोला जिया जहाला

जहाज जे जेठ जे झासा जावे जहान जुटने