emptee _oad _ork a_ead

for u ee a de_il u bet_er c()ase

_et y-0-s in()id u f()eezing cen_er p_acing

भरपूर 0 ban_er lit_ing in()id lan_er


_ether u _ar ()_anted or _aunted ho_se
is _ull of y-0-s in()id on s_ouse
en_oying ever-y1′ *ple _ives aro_se


wet_er u _ar _reathing _ife on _ur_ace, _iddle or ce_ter
(for 0 u _ast in()id that _hi_ch is on s_ir)
a full_ess _oing do_n _ol _as em_tee _eaning
re_ain on _ur_ace odo_r of _ullness _oul


u mae 0 know 0 mae u _ow

_till u t_ink _ow to co_or in()id _ink
c_az-y u _hink y bec_me full_ess in()id _ink

0_ing _ache u _eel mo()e for ever-y1-thing is in()id s_ore

on _ean to _eep भरपूर y-0-s in()id u भरपूर an-i-_als
in ()or_er is a _ol s_ick _hoas loa_er

-वा(कम)ायी

सास की भरपूर आखो को म()दरमा घटता बढ़ता नज़र आता है
यह नहीं पता गोदी में एक-एक सूर्य भी एही करता है आधा दिन के अंदर


तुमहारी दवा की भरपूर आयी तो सास को gut के अदर गला नही सकती
तो क्या दवा को red भरपूर gala _ut करेगी
———————

बाहर भरपूर कामो के लिये उत्सुकता से उकसाते है
और अदर बचो की भरपूर वाट लगाते है
बेटा हम भी ऐसे ही पले बड़े है
भरपूर घर तो ऐसे ही एक भले भै
ख़ाली घर में क्या दीवारों से भरपूर सर फिरोयोगे
सास के अदर एक एक कैसे अड़ा-योगे

सुर-सागर मंथन

गोदी के अमृत के लिए


असुरो और सुरो के बीच में सुर-आ()गर मंथन


सुरो के हाथ है केतु की पूँछ (नहीं होगी सफ़ेद मूंछ) और असुरो के पास राहु की धड़

(आगे से पकड़ पीछे है जकड)


तभी तो जब-अब देखो


तूतू मे मे दुनिया का एक दिन तू खुद ही

सास की धड़ ख़रीदेगा या खरोंदेगा


अपवित्र असुर

घर के अदर ही सास रौदेगा

@_act i-su_ed

@trac_ing क()मा wor_t ho_er
_itting y-0-s in()id u वेहला to_er
भरपूर घर के आम बेकार
सास भागे बाहर तकरार
घर है पूरा ऊर्जा of -un
अदर बिठियायो भरपूर -on

————————

तुम-हारी सास की अदर-बाहर की भरपूर तूतू मे मे ने गोदी को लूटा
सास का भरपूर दामाद आहा है लूट
तुम-हारी दुनिया मे एक-एक की बीमा(या)रियो का भूत
आधा जनम धोये फूट


सास को बद(या)लोगे या बद-ला लोगे
neither 0 सास रो-गोगे


भरपूर ऊर्जा को छूत की बीमारी होती है अब क्या आये छूटा ना छन-दर छही छाये
li_ing _ell in()id u _ol y-0-s s_ell

ख़ाली प-लड़ा -कु(बि)कारी

आधे दुनिया की भरपूर सडको की छाक छाली छान छा

और भरपूर सास का दामाद अदर ही एक इज़्ज़त

भरपूर मान बड़ा भाड़ा भरा भा

जल्दी से किराया ख़ाली करो नही तो लुटेगी बात


कलयुग का प-लड़ा है भारी

अंदर नहीं कन्या कोई कुँवारी

ख़ाली तारो रेश

गोदी तृप्ति तो ख़ाली घर से होती है
क्या तुम्हे भरपूर आखो से अज़र अहि आया


रा के केस भू(ल) गये ख़ाली संदेश
छूटे आदते भरपूर बने अंदर बेश
अदर न शरमाये बिखरे न वेश
भरपूर मे तो नही तत्वा तरेश

he(weillage)al-thy

y-0-s in()id u a_way _ets in y _ae _y a_using ever-y1′

bodi-mind har_on()i in()id u


y-0-s in()id u suf_er-lo _ring in()id ever-y1 un_er on _tick


an e*mpt_ ve__el _ach _ost nois

ख़ाली मटकी शोर मचाती मा
और
y-0-s in()id u ()estle _ides _ol 1 _ir_y pois


u _oint it _out poin_ it u do-u_t

a y-0-s in()id _or_man _lames u _ools