एक मियानी

जब आधे-आधा सास के अदर होके

एक नही रह सकते

तो पेरो की मियानी में दो मरद कैसे

कल कल करते का

सीधे सीधे बतियाओ

एक घर के अदर दो ()रद रो रुकते रा

येसा थोड़ी दिखता दा

शुद्ध शादी फेरो की फूटी फ

दुनिया की एक बर्बादी मोल मली मय

क्यो नही पल सकते पाछे पभी

बनेगे तो भरपूर भक्के बही

हम दो हमारे दो सच्चे सती

छी छोर सवा


ि छदा छोर छत-वाले छांटे
ख़ाली खोर खाट खाटे
दारू दौर दनदर दते
हिस्की हट हरपूर हटे हाँटे


कितने सवाल सास के सवा लाल
अदर ही भरपूर एक बाल
तो क्या _urg करने भी एक आधा साल
किसे बताते अदर भरपूर भाल

_uch -कल

सुद्ध-बुद्ध का जला एक-लौता भरपूर पिला

y-0-s in()id u भरपूर बुद्धि भी झल्ला कर झोकती झा

अदर y-0-s in()id u की जान है (बचा) तो नेक (नचा) जहान एक महान (मचा) मे

ख़ाली खंडे

आधे ख़ाली शैईया उठाने के कंधे नहीं है दुनिया के नेक बन्दे
बूंदिया ही लाए ख़ाली खंधे ख़ाली हो रुख्सत रहे राद द्रोण दे दंदे

ख़ाली रखने से गोदी गोत ख़ाली गति गा

माड़े क()मो को खरीदी बीमायारीयो की भरपूर कमायी दाता कोई सास अदर

जैसी अदर मोड़नी वैसी बाहर निचोड़नी
कहा है बिगड़ी होई भरपूर तोड़नी

-या -र

बिना गीले गी श्राप गिया
फिर तो पाप ही आप पिया
धुया धरदर धाप लिया
रत-रा रोये रात रिया
धत धोये ध-धात धिया


भरपूर सोचने से सास की सात सगी अदर जागी जात जा


मकरे की बा तो मनायेगी की मेर
तलो की भरपूर त्रास तले ताली तेर

विद्या-मथानी

श्री धन्वंतरि जी की विद्या-म()धानी को भरपूर बेचा और बिच-वायो


तभी तो इतनी बरकत बीमा(या)रियो के सवा()लो की बनायी और बनायो


विद्या तो खभी गहरी नहीं खो खक्ति खायो और खवायो


तो gut के तल के ऊपर ही भरपूर दामाद उडायो


सास तो भहरी ही भोती भरपूर भतायो


लुढ़क लुढ़क लरपूर लात लतायो

-ईया

सास के भरपूर दामाद का घर के अदर भरपूर रवईया

लाये तूतू मे मे की दुनिया के एक-एक भया भइया की शईया

अपवित्र ही भरेगी खाख खा खुसुर खईया