सास के भरपूर दामाद का भगवन ऊपर ही कही रहता है
अदर तो जगह है भरपूर के लिये
जब सास के भरपूर दामाद की मे अदर ही पूरी -यान मे नही ही
तो बाहर की तू पूरे यान मे ही यायेगी तो
दामाद याद यहा yea()ning yoo_
सास के भरपूर दामाद का भगवन ऊपर ही कही रहता है
अदर तो जगह है भरपूर के लिये
जब सास के भरपूर दामाद की मे अदर ही पूरी -यान मे नही ही
तो बाहर की तू पूरे यान मे ही यायेगी तो
दामाद याद यहा yea()ning yoo_
कहते है ऊपर वाले की मर-जी के बगैर पत्ता पही पलता
(मर-जी ऊपर भरपूर होती है अंदर तक आते आते
ख़ाली हो जाती है स्ट्रेटोस्फियर में पलायन की आग से)
ऊपर वाले के पास पल नहीं होता या अंदर वाले के साथ _@chi मारता
पत्ते तो गोदी में पवन पुत्र की मर्जी से उड़ते उ
इसका बल मत यह है की सास के अदर का एक-एक पटा पूरा पल्टा
हाजमोला से मोला नहीं आधे का खड़पुर खड़ा खडगोला गोल खारा खोला
y-0 _if _ik _round_og da_
_et ri_ _it in()id u _ol _og ha_
गू-गल f1 app-पल
0 con_ain-er gra-पल
to-y_ta in()id u _tra-पल
du_l v i’m _olling _it a-er-टल
तूतू और मे मे साथ-साथ मिला(ा)प
क्या होगा एक-एक भरपूर फिर विला-प
बजेगी बाठी बायेगा भरपूर भाप
बिकलेगा बाहर सास की रमड़ी राप
—————————————
सपने मे सास अदर जाग जही जाती जा
और बाहर बो ब्या-ही बोती बा
सपने बनते और बिगड़ते भरपूर
सास भी सगल सारती सर पूर
जाच जा जाने जागन जे()ड़ा टूटा टार टूर
s_& cle_ar
in_ar_ _oor op()n
y-0-s in()id u mop()n
जो बैठे थे उनको खडा खाड़ दिया
बिना खाड़े अंदर नहीं घुलता
ख़ाली दरवाजे की भरपूर ताली तो एक साथ से सी सजती
भड़ाम आम
भरपूर भेदभानी भरपूर भाया भय भवानी
जब आधा सास की अदर भरपूर भ()ददा की भरपूर ये()मियत है दुनिया के एक एक मे
तो आधे की ख़ाली बाधा की क्या ख़ाली न()सीयत गोदी मे
यह तो तु()हारा भगवन भी न जाने सीधे सास के सादे मे
an in()id ()fin-it si_ple wa_s to bet_er y-0-s pre-g_a_nt he-al-t_y in()id u
ju_t _eep _iting ever-y1′ 1 in()id u _iting
a c_ean pro-teen is ne_ther _hey _or p_ant r@_er _ol y-0-s in()id u ever-y1 _p_een
You must be logged in to post a comment.