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कलियुगे के कल-मनुष्य का आज-कल भविष्य (भाव-विष-यय)

भरपूर गाठो का एक-एक अदर शिष्य

1 wor_d f_ea_ur is _ooking b_ite उद्देश्य

भरपूर स()बूत

गोदी सांसो को दो()का दही दाती
आधे आली आतुर अभी आया आती

आत्मा के अच्छे-सच्चे सह सही सकते
अच्छी आदतों की भरपूर नुमा(फर-मा)ईश नाती नहीं नकते

तुम-हारे तू को घर के अंदर ख़ाली रसूल के असूल का नहीं पता
हमें क्या करना तुम-हरी भरपूर इधर उधर भरपूर सास के दामाद द-खता

ju_t a _ag

stre_ch 0 _ind
y-0 s_ay b_ind


for u in()id 0 _ar su()jected to y-0 _ive de_th &
0 _ble to e*/ience in()id _ub_ect even a_ter odd s_eath
& ob_ect /cept godi’ to()tal _ark in()id alive brea_th

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for 0 fa_l_ing in()id _ut 3ice

ever-y-thing 0 s_arting sum_ere _ut
in_luding in-su()red dis()as()s 0 s_ut


a t_in _ull da()_age _ocks _an a_d 10 _ears to y-0 _age

मैं नहीं खाखन खायो

अब सृष्टि गोदी में मईया ने खुद बाल शुनया बिंदु

को माखन खाने खो खिला ख़हे खा

तो भरपूर भ()ल-ज़ाम तो सास की तूतू मे मे ने

अपना भरपूर सिद्ध करने के लिए लगाए ला

अब इस सास सो सदगे इधर-उधर के ख़ाली डंडे

ना भूले भाली भेहेर अदर-बाहर भरपूर भंडे

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1 we_k_ess 0 c_ear feel u st_ange in()id _ound
sum-1 own em_sh-un 0 _ach-ing qu()it _it 0 _oot

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_eep d_eam diu_nal

y-0-s in()id u _eeling do_n _eed to _heer y-up

tu_n 1 _out do_n in()id _aiting 1 _urn re_out

y re()que_t _an 0 be comp_eted _ow
for y-0-s in()id u _ar bu_y fr()8 _ow

सर सरे

y-0-s in()id u की ज़ुबान का खूले(आ)आम सरपूर साड़ा
तूतू मे मे से लड़े लरपूर लारू लाड़ा
दिन-रात एक आरे-आ-अदर भीड़े भाड़ा
जो लड़े सो मरे न उतरे क्रीड़ा करपूर काड़ा

0 दर-डर
घर के अदर एक एक का मुह-खोटा भरपूर उजारड़ते आ और
बाहर उजड़े हुयो हा एक-एक मुखौटा भरपूर पहनते पा


अदर एक एक के ऊपर पूरा _go _ub झाड़ते झा
और बहार एक एक से डरने के हज़ार मुखोटे अदर मुह छुपाते छा

ठेके
भरपूर सास ठेके तूतू मे मे समाज सेके
और भरपूर भौ()त गोदी के भरपूर भेके
यह क-मायी तो भरपूर भधायी आधा जन्म जाड़ा जेके


दिन में न भरपूर मौत से डरे
इसी लिए सास रात को ही भरपूर सर सड़े

_@ f_ee da_n

u _ar pa()ent
y + a2z is f_ying up in()id u for – 0′ _ar
re_urn min_fu_ness in()id y _ut _aching a_on u
in-su()red dis-eases _@ient f_iend_hip _ut

cause & effect

_ol _oga is de-st()oyed b-y adha janam _imple 1 cau_e
y-0-s in()id u _ense effe(r-ej )ct y-all

an o_d u _ven _lan & y-0-s in()id u que_tion
_ow s-an is this in()id od_ out even pa_

y-0-s in()id u ea_ing rit for u _ar 1 _rit


a भरपूर air s’ood be e*pelled & y-0-s
in()id u _ar bus-y s_elling a – ir
_an this be 1 sy_lable
0 awa-y-er

y-0-s in()id u disorder chaos app()ar & 0 dis_p_ear

y-0-s in()id u s_able p_@fo_m bui_ding out()id s_ag_ant _ife

a g_eat un_er-st@ings of _ol err’s is _a_m of y-0-s in()id u _ame

पूरे डठे आठ

तुम-हारे अपने अदर आधा जन्म की सास दगी भरपूर भर डकैत डाके
फिर दमाद तो भूले भटके भाटा के ज्वार जाके उचा आखे

ठाठ बाठ पूरे आठ
अदर भिड़े भरपूर जूठे जाठ
भात भात के भिरे नर नाठ
धरो भरपूर धत धत धेरे धुली धाठ

पिगला गाते

पढ़ाई का बल मत पढ़()आई

और सास का दामाद कहा गया है धरने
i को बाहर खरीदने खैर खाते
भरपूर भक भर अदर भय-लाते
एक-एक ना समझ बाहर बाते
पूरे पैर पड़े ना इधर उधर प()ते
परपूर पढ़ पिगला गला गाते