क्षमा -याद

क्षमा मांगने मे माँ-बच्चे का क्ष बचता मा-बा

सृष्टि गोदी की माँ क्या लगती है तुम-हारी

जब भरपूर मा ने तुम्हे कोई सजा नही दी घरपूर घर को दुनिया की रजा भा-रायी
(मा-बा की आखो को तो सामने-आमने ना नज़र आया तूतू मे मे का भाया)
जो अपने एक को दुनिया मे ऊपर चढ़ाने के लिए कितने को निचे गिराती गा
धर-मो की बटी फ़रियाद ना धिक्कारे अदर एक बरपूर बुनियाद

al_ly

natur-ally na_ural-ly na_u-rally
y-0-s in()id u co_y pri-vy ever-y1′ _ry _ol a_ly

_h@ _as be_un 0 en_ing in()id u-rn
1 b_am & u _ar s_am
y-0-s in()id u p_ivy of ever-y1′ _a_m

u _ar _oing to we_tfi_ld
p() a _ry of in()id y _ield
re_urning _om _ry 0 _ield
y-0 _a_ic _ol 1 _ual 0 _ealed
0 _ending in()id 1 _ry _eeled
_ound 1 in()id u 0 _ry _ield

0 2 me_tion dis-com_ort _asks _ind of y
inner is an inn of st-ir _ol _@_iety of _ar
in_er-ac_ion _it _ask

0 _ad_ow

y-0-s _u-man 0 be-ing in()id u su(1)_an

con_rol_ing 0s & in()id u 0 _ot

सास के दामाद की गाठो के क()मो ने अदर ना कुछ सिखाया
सब कुछ बाहर के इधर उधर के पूरा-तन ध()मो ने
तूतू मे मे दुनिया का एक-एक नेक बनाया
भरपूर भाया अदर-बाहर जोड़पूर जाया

गोदी से गफा

घर के अदर इधर-उधर की लड़ायी
एक देश के अदर-बाहर की पूरी पढ़ायी
भू के लेखे में असुरो की ज़मीन की ऊंचाई
न मापी किसी ने अपनी जुबान जी तूतू मे मे भरपूर तुरायी
किसी को न भनक सास के दामाद के
भरपूर भाड़ भी भगदड़ बिंदी बी बिदायी