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y _eep _aeing i do 2 u _uffer _ach

adha ja_am _uffer up/do_n _uf_er

for y-0-s in()id u _ar do(er)ing _eep

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y-0-s in()id u he-al_hy
0 _ar _ol we(illage)al-thy
on wor_d in(out)id s_eal-t_y
0 no loo_e wan_er _is th-y


भव्य भूल

दुनिया के नेक एक को किसने देखा चुलु भर तूतू मे मे तानी मे भरपूर डूबते डा
जरपूर जुबान जे जेखा-तेखा तभी तो तीखा तरपूर तोखा

गाठो का अदर अनुभव
ना देखा दिन-रात का भरु भरपूर भव

बे-तुके सवालो की जु-बान बिछाये अदर-बाहर जरपूर जाल
न तोड़े तिसे तक तदर तरपूर ताल

ख़ाली खठ खठ

०५=५०

ख़ाली चठ-बठ

ख़ाली आधा जन्म सृष्टि गोदी के अंदर दिन आधे अंदर रात

ख़ाली साँस n()w to()al आधे अठ अट अट

० नव-शिशु ५ इन्द्रियाँ _ut गोदी ख़ाली खट खट

काल के ख़ाली पुतले काला-काली कुल कठ कट कट

आँगन में बलाएँ बूंदियो की बठ बट बट

s_it 0 u

y-0-s in()id u _its _ar ne_er _out _it

भगवन को दुनिया के एक नेक के अदर की भरपूर बत्तिया बहुत भाती भा

गोदी का अँधेरा तो ख़ाली खलता भूर भागता भग भग