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सासे गहरी करने के लिए घर के अदर उ()रजा रही राह
और काल को बदनामी का भाग भरपूर नाम भगा भरा भा
तूतू मै मै दुनिया मे एक=एक ने


मेरा शरीर मै मै माड़ी माफ़ मरना
तेरा त()रीर तूतू अदर खुला खडना
दामाद दो दाया दरी देहते दर()ड़ना

छाप

गोदी की मिट्टी के ऊपर राख
फिर भी इधर उधर भरपूर आख
अदर उगलाये बाहर बा बिलख विलाप
सास भारी भरपूर आसू छी छाप

तुम अंदर हमें नहीं जानते
तूतू मे मे का मौन मानते
इधर उधर नही रहते जागते
याद के यारपूर यही त्यागते

ज़ुबान का भतीजा कब तक भत्तीसी के भान से जुये जुड़ायेगा

हमारी आत्मज्ञान का दुःख तो सास ने अदर ही भरपूर आधा बिछा बखा बा