अंदर-अदर

गोदी के संसार के ख़ाली अंदर
दुःख-सुख तो बुँदियाँ ही दिन-रात पि-रोए
पाओ पोए परे पट खट खट खोए

बुँदियों को ना मिले मझधार
गोदी में तैर तहा तरपूर तिरदार
काहे का कंधे कुम्हार कहार
निवाला अदर नीवा बाहर बीमार
नि-ठले ठयू ठहरे उ उतरे उठाव

भट भट

ख़ाली खो भरपूर भहाना दुनिया का एक -एक नज़राना
अदर ना टिके दामाद दो देहर दुहाना
जल्दी जय जायो ज़ुबान जबाना
भरपूर भटर भाट भिखाना

यानी -नी

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इसी लिये घर बाहर बहाना लाना ला लारे लो ल()पकेगी
किधर

अंदर की शुरू कहानी कुरु कानी कन कमानी
वापस ना आयी ख़त्म खी खुरु खा-मानी
बाहर भरपूर गवाही ग्यानी गानी

0 रग

जब हाथो मे ही अदर-बाहर काम
ख़ाली ढंग से करने की ब()कत बही बा
तो आधा जन्म की ह()कत हया होगी


भरपूर भोगी सास का दामाद अदर रोगी