हनु का मान नहीं रखना राता
तो अनु को क्यो नही मानेगा माता
Category: gut
din_ di_g
f_@ pe_ple a-ro_sing
y-0 s_eep s_aving ho_sing
re_emb-er-ing y-0 is ever-y1-t_ing
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0_ing _ead is not_ing
du_e _it d-ou_t
b_own _races b_ought 0 _aces
a s_eed of ()illage _ill is fa_t-er t_an _ol 1 t_uth
कर काया
ये ख़ाली या ख़तम खो खेहा
क्यों नहीं शुरू शो शय्या
y-0 le_s _tar_ _tal_ing साया
अनुभव मे गाठ गाया
भाहर भूढो भाव भाया
अमीर असुर आडे आ या अडा आ आहे
y-0-s in()id u re_er_s s_a_king
सर बर बफ़न बाध बो
बल मत कफ़न काढ़ता कर
क्यो नही कही कडा कमय कमाया
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0 all()wed
-गा
बाहर सा सोयी सगा
घर के अदर दरपूर दगा
जात जोग रग रग रगा
भरपूर भगा लडपुर लगा
ਜੁਬਾਨ ਦੇ ਜਿੰਦਰੇ ਜਾਚੇ ਜੋਏ ਜਾ
ਤੇ ਜਾਤ ਜਲਦੀ ਜਾਤਾਲਾ ਜੇ ਜਾਲੇ
ਅੰਨੇਵਾਹ ਬਲ ਮਤ
ਅਣ ਅੰਨ੍ਹਾ ਆਦਾ ਆ ਅਦਰ
यह-वोह
यह क्यो नही पडते वोह क्यो नही लादते
ये क्या पहना मेरे वाला मत क्या दहना
कितने क्यो अदर ना यू
बाहर बिखाये बतर त()र बू
सुहाना दिन-रात सफर
सासो सा सुदर ददर
इधर उधर के अदर मै डफ्फर
तेरा यू बाहर बूहे रफू चफ्फर
तूतू मै मै को मेरी चहुत चिता चा
जुबान जे जोड़ी जिनका जता जा
जाहिल जान जहान जी जू जान
जय जय जिले जो जताये जुबान
a to_ 2 _on
सोने का बल मत y-0-s inid
u is _aving भरपूर भा()राम
सृष्टि गोदी तो कभी सोई सी सही
ना कलयुग के कन्धार कही
हर रोज दिन मे भरपूर _uc_ear a-tom
और रात मे सपनो की _um _ar _a-ton
अब ज़मीन जे ज़ुबान जी जुस्की जुकली जक्ली
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ਖਾ-ਖੋ
ਬਾਹਰ ਦੀਆ ਪੜਾਇਆ ਪਾੜ ਪੇ ਢਲਾ ਦੀਆ ਢੀਂਗਾ ਢਕਦੇ
ਅੰਦਰ ਦੀ ਖਾਲੀ ਪਰਾਇ ਨੂੰ ਖੜਾ ਖਾ ਖਾਦ ਖਕੇ
_ar mon_er
y ho-y 1 _an va_ue _ood 0 me_su()ed bie () _arm-on-ee

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